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जबलपुर. शहर के बिल्कुल मध्य में विज्ञान के अनूठे आदर्शों पर टिकी मदन महल पहाड़ी के विकास की योजना में सौर ऊर्जा का उपयोग उसे अलग पहचान दे सकता है। प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर पहाड़ी को सौर ऊर्जा से रोशन करने पर अलग ही तस्वीर सामने आएगी। साथ में नेचुरल साइंस पार्क बन जाए, तो खूबसूरती और बढ़ सकती है। बैलेंसिंग रॉक, जलस्रोत, औषधीय पौधों के अलावा नवीन एवं अक्षय ऊर्जा के उपयोग से इस क्षेत्र की तस्वीर बदलेगी। कुदरती पहाड़ी के विकास की हर योजना की लकीरें इको फ्रेंडली तरीके से खींचे जाने पर पर यह पहाड़ी इतिहास, जलसंरक्षण, न्यूटन के बल सम्बंधी सिद्धांत के साथ ही प्रकृति को सहेजने का जीवंत मॉडल होगा। अंचल और प्रदेश में एेतिहासिक और वैज्ञानिक पर्यटनका अनोखा केंद्र बन सकता है।
news facts- मदन महल पहाड़ी को पर्यटन केंद्र के रूप में मिल सकती है अलग पहचान
सूरज की किरणों से बने बिजली तो और खूबसूरत हो सकती है ‘तस्वीर’
इको फें्रडली
पहाड़ी के संरक्षण से जुड़े जानकार और इंजीनियर मानते है कि मदन महल पहाड़ी प्रकृति की अनुपम देन है। कुदरत, इतिहास और विज्ञान का अनूठा संगम है। इसको ध्यान में रखते हुए ही इसके आगे की विकास की योजना तय की जानी चाहिए। पर्यटक सुविधाओं की दृष्टि से किए जाने वाले निर्माण को भी इको फ्रेंडली होना चाहिए। प्रत्येक निर्माण में दिन के वक्त सूर्य की प्राकृतिक रोशनी और रात के वक्त प्रकाश के लिए सोलर लाइट सिस्टम को उपयोग में लाना चाहिए।
अभी ये है हालत
प्रकाश: रात के वक्त बैलेंसिंग रॉक को दिखाने के लिए नगर निगम की ओर से शिला के आसपास आकर्षक लाइट लगाई गई है। यह एलइडी लाइट्स हैं। जब जलना शुरू हुई तो रात को रॉक की खूबसूरती निखर जाती थी। लेकिन, इन लाइट्स के तार कुछ ही दिन में चोरी हो गए। इससे कई एलइडी बंद हो गई हैं।
पेयजल: पहाड़ी में पर्यटकों के लिए पेयजल का उचित बंदोबस्त नहीं है। किले सहित कुछ जगह पीने के पानी की टंकियां लगाई गई हैं। ये फूट गई हैं। शरारती तत्वों ने कुछ जगह टंकी में गंदगी डाल दी है। पहाड़ी के आसपास के जलस्रोत को स्वच्छ रखा जाए और पत्थरों के बीच बहने वाले पुराने झरनों को संरक्षित कर लिया जाए, तो इसे फिल्टर कर शुद्ध पेयजल भी पहाड़ी पर ही मुहैया हो जाएगा।
यह करने की जरूरत
जानकारों का मानना है कि प्रकृति और वैज्ञानिक पहलुओं को जोड़ते हुए पहाड़ी को पर्यटन केंद्र का स्वरूप देने की जरूरत है। इससे आम लोगों को इतिहास के साथ ही उस वक्त के वास्तु में विज्ञान की महत्ता का सबक सीखने को मिलेगा। इंजीनियरों का मानना है कि पहाड़ी पर पवन चक्की लगाकर उसका महत्व समझाया जा सकता है। पहाड़ी पर सोलर ऊर्जा उत्पादन कर वहां की अधिकतर व्यवस्था के संचालन में अक्षय ऊर्जा का इस्तेमाल करने से यह पूरा पर्यटन इको फ्रेंडली जोन के रूप में लोगों को आकर्षित कर सकता है।
मदन महल पहाड़ी प्रकृति का एक देन है। उसके प्रकृति के अनुरूप ही विकसित करना चाहिए। सोलर ऊर्जा के उपयोग से प्रकृति को संरक्षित रखने में भी मदद मिलेगी। इसका इस्तेमाल बढऩा चाहिए।
- संजय वर्मा, इंजीनियर (सिविल वर्क)
पहाड़ी पर न केवल प्रकाश व्यवस्था के लिए सोलर लाइट्स का इस्तेमाल किया जाए, बल्कि कुछ क्षेत्र में सोलर ऊर्जा का उत्पादन भी करना चाहिए। यहां उत्पादित ऊर्जा का पर्यटक क्षेत्र में उपयोग होना चाहिए।
- संतोष येडे, इंजीनियर (सोलर एनर्जी)
कुदरत ने पहाड़ी को नई विशेषताओं से सजाया है। उसके महत्व को समझना, समझाना और संरक्षित रखना हमारी जिम्मेदारी है। सोलर लाइट्स और झरने के पानी को पीने लायक बनाने पर योजना होनी चाहिए।
- केके वर्मा, वैज्ञानिक (रिटायर्ड प्रोफेसर)
Published on:
11 Feb 2019 11:26 am
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