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जबलपुर. शाकाहार अपनाने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि शाकाहार में सम्पूर्ण पोषण है। अतिरिक्त पोषण के लिए मांसाहार की आवश्यकता नहीं है। कोरोना काल में अस्सी फीसदी से ज्यादा मरीजों को शाकाहारी भोजन दिया गया और ऐसे मरीज जल्दी रिकवर हुए। शाकाहार के प्रति जागरूकता लाने के लिए प्रति वर्ष एक नवम्बर को विश्व शाकाहारी दिवस मनाया जाता है। यह दिवस शाकाहारी लोगों की ओर से दूसरे अन्य लोगों को शाकाहारी जीवनशैली का पालन करने एवं अपनाने के लिए प्रेरित करने एवं जागरूक करने के लिए मनाया जाता है।
फल, सब्जियों और अनाज से तैयार होता है सात्विक भोजन, यह विचार भी शुद्ध रखते हैं
शाकाहार में सम्पूर्ण पोषण, शहर में बढ़ रही अपनाने वालों की संख्या
विशेषज्ञों का मानना है कि हरी साग-सब्जियों, फल और अनाज में शरीर के लिए जरूरी हर प्रकार के पौष्टिक तत्व हैं। विशेषज्ञों के अनुसार मांस में मिलने वाले तत्वों के कारण मांसाहार का पाचन जल्द नहीं किया जा सकता। मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. टीआर धींगरा के अनुसार शाकाहार भोजन का पाचन जल्दी किया जा सकता हैं। पाचन क्रिया में ऊर्जा कम लगने के कारण शरीर को अपेक्षाकृत अधिक ऊर्जा प्राप्त होती है। भोजन में रोगों से लड़ने की क्षमता होती है।
संतों व संन्यासियों की जीवन शैली उदाहरण
संतों व संन्यासियों की जीवन शैली इसका उदाहरण है कि शाकाहार में सम्पूर्ण तत्व होते हैं। जैन संत 24 घंटे में एक बाहर आहार लेते हैं। कठिन दिनचर्या में वे अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहते हैं और पैदल चलकर ही लम्बी दूरी तय करते हैं।
प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट विटामिन
आहार विशेषज्ञ श्वेता भवदीय के अनुसार शाकाहारी भोजन मरीजों को रोग से लडऩे में अधिक ताकत देता है। प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट विटामिन और ओमेगा जैसे सप्लीमेंट का सोर्स शाकाहार में ही मिल रहा है। शाकाहारी भोजन में संतृप्त वसा और कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम होती है। इससे यह हृदय रोगों की आशंका कम करता है। शाकाहार में पानी की मात्रा अधिक होतीहै, उसको खाने से एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन सी होता है। शाकाहारी भोजन अपेक्षाकृत अधिक रेशेवाला होने के कारण पर्याप्त फाइवर होता है। हरी सब्जियों में विटामिन, एंटी ऑक्सीडेंट, अमीनो एसिड होता है। लाल, फल और सब्जियां जैसे चुकंदर, गाजर, टमाटर में ढेर सारे एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं।
वीगन उत्पादों से बने खाने का नि:शुल्क सर्व
जबलपुर के वीगन एक्टिविस्ट नमन तीन साल पहले वीगन जीवनशैली अपना चुके हैं। वे बताते हैं कि एनिमल क्लाइमेट संस्था के साथ जुड़े हैं, जहां मप्र के अलग-अलग शहरों को को ओर्डिनेट करते हैं। वे जिन वर्कशॉप में शामिल होते हैं, वहां वीगन उत्पादों से बने खाने को निशुल्क सर्व करते हैं, ताकि लोगों को यह बता सकें कि सोया, नारियल और मूंगफली के दूध से भी खीर बनाई जा सकती है। नमन कहते हैं दैनिक उपयोगी हर वस्तु का वीगन विकल्प है। यहां तक की चमड़े को भी फॉक्स लैदर के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, जो पेड़ की छालों से बनता है। नमन ने बताया कि शरीर में केल्सियम की आवश्यकता दिनभर में ढाई ग्लास दूध से पूरी होती है, लेकिन यदि एक चम्मच सफेद तिल खाने से यह पूर्ति पूरी हो जाती है। इस तरह एक नारियल से जहां एक लीटर तक दूध निकालने की प्रक्रिया भी लोगों को समझाई जाती है।
Published on:
01 Nov 2022 12:11 pm
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