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जबलपुर। शारदेय नवरात्र की महापंचमी बुधवार को है। विद्वानों का मानना है कि इस दिन मां भगवती को चुनरी चढ़ाने व मखाने की खीर का भोग अर्पित करने से विवाह योग्य किशोरियों को मनवांछित वर की प्राप्ति होती। नवरात्र की महाष्टमी 24 अक्टूबर को मनाई जाएगी। पंडित जनार्दन शुक्ला ने बताया कि इस बार नवरात्र पूरे नौ दिनों तक होगी। ऐसा सामान्यत: कम होता है। अक्सर नवरात्र नौ के बजाय आठ या दस दिनों की होती है। उन्होंने बताया कि पूरे नौ दिनों की नवरात्र का संयोग देवी उपासना के लिए सर्वोत्तम होता है। माता के साधकों को ऐसे संयोग की प्रतीक्षा रहती है। इस बार देवी के प्रत्येक नौ स्वरूपों की निर्धारित एक एक दिन पूजा कर सभी नौ देवियों का आशीर्वाद लिया जा सकता है।
पंचमी, अष्टमी महत्वपूर्ण
शुक्ला ने बताया कि शारदेय नवरात्र की पंचमी का विवाह के योग्य कुंवारी कन्याओं के लिए बहुत अधिक महत्व है। इस बार पंचमी 21 अक्टूबर को अष्टमी 24 अक्टूबर को है। उन्होंने बताया कि पंचमी के दिन विवाह योग्य कन्याओं को प्रात: स्नान कर माता स्कंदमाता को लाल रंग की चुनरी अर्पित करनी चाहिए। माता को मखाने की खीर का भोग लगाना चाहिए। नवरात्र की पंचमी व अष्टमी नौ में से सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। पंचमी के दिन माता का विशेष पूजन किया जाता है। अष्टमी को माता के विशेष अनुष्ठान होते हैं। हर वर्ष अष्टमी के दिन शहर में जगह-जगह भंडारे आयोजित किए जाते हैं। हालांकि इस वर्ष कोरोना को देखते हुए भंडारों की मनाही है।
Published on:
20 Oct 2020 08:15 pm
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