
young boy loves hot and young married lady
जबलपुर। आजकल सोशल मीडिया और सोशल नेटवर्किंग के जमाने में बच्चों की मानसिकता भी समय से पहले विकसित हो रही है। वह अपने आप को बड़ा समझने लगे हैं। जब भी नासमझ की उम्र में उम्र के दौर से गुजर रहे हैं। ऐसा ही जीता जगता उदाहरण कुछ माह पहले जबलपुर में देखने मिला जब यह 19 साल के लड़के ने 2 बच्चों की मां को प्रपोज कर दिया। उसने बताया कि वह पिछले कई महीनों से उसकी सुंदरता का दीवाना था। इसलिए वह उसे प्रपोज करने पहुंचा था। जानकारों की माने तो इस तरह की मानसिकता उनके भविष्य के लिए खतरनाक है। इससे बचने के लिए परिजनों को चाहिए कि वे अपने बच्चों को समय दें और उनकी सभी बातें सोचे समझे और सुनाएं।
ये है सच्ची घटना -
पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार भंवरताल उद्यान में लोगों को परेशान करने वाले एक युवक को गुरुवार को कोड रेड की टीम ने दबोच लिया। बड़ी मदार टेकरी निवासी मोहम्मद दिलशाद शाम को उद्यान पहुंचा। वहां वह जोर-जोर से 'आई लव यू' चिल्ला रहा था। कुछ लोगों ने उसे मना किया, तो वह उनसे उलझ गया। दिलशाद ने वहां घूमने आए एक परिवार के साथ फोटो खिंचावाने की जिद पकड़ ली। जिसमें एक महिला अपने बच्चों के साथ आई हुई थी। बार बार मना करने के बाद भी दिलशाद ने अपनी जिद नहीं छोड़ी, आखिरकार लोगों की मदद से परिवार ने इसकी सूचना कोड रेड को दी। सूचना के बाद महज पांच मिनट में ही टीम के सदस्य मौके पर पहुंच गए। इसके बाद उन्होंने सिरफिरे आशिक का भूत उतार दिया। उसे गिरफ्तार कर थाने ले गई।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
बाल मित्र एवं बाल कल्याण समिति सदस्य मेघा पवार का कहना है कि ये मानसिकता सोशल साइट्स के चलते पैदा हो रही है। फिल्मों से लेकर सीरियल्स में दिखाया जाना दृश्य उनके मानसिक विचारों को परिवर्तित कर रहा है। माता पिता द्वारा समय से पहले मोबाइल देना भी इसमें कुछ हद तक जिम्मेदार है। नॉलेज की चीजों को भी गलत तरीके स्वीकार कर रहे हैं।
मेघा पवार ने बताया कि बाल गृह में आने वाले बच्चों की मानसिकता से यह बात साफ भी हुई है। बच्चों ने खुद ही स्वीकारा की वे पहले टीवी में देखते थे, फिर उनके सामने होने वाली घटनाओं से भी उनकी सोच समय से पूर्व विकसित हो रही है। मुख्य कारण उत्सुकता का होना है। कई बार तो महिलाएं भी उन्हें आगे बढ़ाने में काम करती हैं। महिलाओं को चाहिए कि वे बच्चों को समझाएं, परिवार वाले बच्चों को टीवी के भरोसे न छोड़ें, अपना समय दें तो उसकी सोच को बदला जा सकता है।
अपने से बड़ों की संगत
मेघा ने बताया कि छोटे बच्चों के बिगडऩे में दोस्ती भी अहम भूमिका निभा रही है। अपनों से बड़ों की संगत या दोस्ती भी बालमन को विकृत कर रही है। उनके साथ रहने उठने बैठने के कारण वे उन्हींं के जैसे सोचने करने लगते हैं। जब वे साथ नहीं होते हैं तब वह अकेले में उनकी बातों को याद कर अपने से बड़ी उम्र की महिलाओं के प्रति आकर्षित होकर गलत कदम उठा लेते हैं।
Published on:
21 Nov 2017 03:30 pm
बड़ी खबरें
View Allजबलपुर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
