
40 दानदाताओं के पैसे से 67 हजार में 83 साल पहले शुरू हुआ था संभाग का सबसे बड़ा अस्पताल, और आज
आकाश मिश्रा/ मनीष साहू/जगदलपुर. महारानी अस्पताल के री डेवलपमेंट के काम का पहला चरण पूरा हो चुका है। इसके तहत अस्पताल को ओपीडी, केजुअल्टी और ओटी के रूप में नई बिल्डिंग मिली है।
काम को रिकॉर्ड समय में पूरा किया
शनिवार को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जगदलपुर पहुंचे और उन्होंने सबसे पहले केजुअल्टी का फीता काटकर अस्पताल के नए स्वरूप का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि सरकार के बनने के बाद हमारी प्राथमिकता जगदलपुर को नई साज- सज्जा के साथ महारानी अस्पताल जगदलपुर के लोगों को सौंपना था। इस काम को रिकॉर्ड समय में पूरा किया गया। इसके लिए कलक्टर और उनकी पूरी टीम बधाई की पात्र हैं सीएम के साथ मंच पर सांसद दीपक बैज, बस्तर विकास प्राधिकरण अध्यक्ष लखेश्वर बघेल, विधायक रेखचंद जैन, चंदन कश्यप, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम, शहर कांग्रेस अध्यक्ष राजीव शर्मा मौजूद थे।
1936 में 67 हजार खर्च कर बनाया गया, दान से जुटाए गए थे पैसे
साल 1936 में महारानी अस्पताल का प्रारंभिक स्वरूप बस्तरवासियों के सामने आया था। तब 150 बेड के साथ शुरुआत की गई थी। अस्पताल का निर्माण महारानी प्रफुल्ल कुमारी देवी से मिली दान की जमीन पर किया गया। अस्पताल में 35 साल से अपनी सेवा दे रहे डीके पराशर ने बताया कि उस वक्त अस्पताल के निर्माण पर 66 हजार 697 रुपए और 97 पैसे खर्च किए गए थे। यह रकम बस्तर के 40 दान दाताओं से जुटाई गई थी। इसमें महारानी प्रफुल्ल कुमारी समेत एक अंग्रेज अफसर व सुकमा जमीदार, कुटरु जमीदार, भोपालपट्टनम जमीदार के अलावा 40 अन्य लोग थे। यह पूरी जानकारी महारानी अस्पताल की पुरानी इमारत में लगे एक ताम्रपत्र पर उल्लेखित है। फिलहाल इसे अस्पताल प्रबंधन ने अपने पास संभालकर रखा है। कुछ वर्ष पहले तक लोग इसे अस्पताल की दीवार पर देखा करते थे।
Published on:
25 Nov 2019 12:26 pm
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