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पढि़ए एक ऐसी नर्स की कहानी जो सिर्फ बच्चों की एक मुस्कान के लिए 19 साल से नदी नालों को पैदल पार कर दे रही अपनी सेवा

धुर माओवादी प्रभावित (Maoist affected) अबूझमाड़ क्षेत्र जिले की कठिन भौगोलिक एवं विपरीत, विषम परिस्थितियों में भी ब्लूरानी बैरागी 19 सालों से गर्भवती महिलाओं (pregnant women) के समय पर खुराक और टीकाकरण (immunization) का ध्यान रखती है।  

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पढि़ए एक ऐसी नर्स की कहानी जो सिर्फ बच्चों की एक मुस्कान के लिए 19 साल से नदी नालों को पैदल पार कर दे रही अपनी सेवा

राज्य सरकार जहां आदिवासियों की अच्छी स्वास्थ्य सुविधा शिक्षा और सामाजिक-आर्थिक उन्नति के लिए काम कर रही है। तो वहीं धुर माओवादी प्रभावित अबूझमाड़ क्षेत्र जिले की कठिन भौगोलिक एवं विपरीत, विषम परिस्थितियों में जिला स्वास्थ्य अमले के लोग भी पीछे नहीं है।

1100 से ज्यादा आबादी के स्वास्थ्य का ध्यान रखती है
बारिश में उफ नते नदी-नालों को पार कर गर्भवती महिलाओं, बच्चों को समय पर टीकाकरण कर अपने दायित्वों का बखूबी निवर्हन कर रहे है। यह बातें बताने या कहने की नहीं चित्र सब बातें बयां करते है। ब्लूरानी बैरागी 19 सालों से नारायणपुर और ओरछा विकासखंड के सात गांव झारावाही, हतलानार, घूमा, पीटेकाल, कोडऩार, अलवर (पहाड़ पर है) और कुमनार के लगभग 1100 से ज्यादा आबादी के स्वास्थ्य का ध्यान रखती है। बैरागी ने कुकुर नदी पार कर बच्चों को रोटा वायरस व गर्भवती महिलाओं को हतलानार पहुंचकर टीकाकरण और गर्भवती महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य की जांच करने के अलावा वे 6 गांव के बीच में पडऩे वाले नालों को भी पार कर बच्चों, गर्भवती महिलाओं को टीकाकरण और उनके स्वास्थ्य की जांच करती है। बैरागी को भारी बारिश में नदी-नाले में ज्यादा पानी होने पर गांव मेें नहीं पहुंचने का मलाल रहता है। उन्होने बताया कि चारों से घिरे घने-जंगलों, पहाड़ों, पथरीले और ऊबड़-खाबड़ रास्तों को पार कर आना-जाना करना पड़ता है।

ग्रामीणों के स्वास्थ्य की जांच के लिए नहीं पहुंच पाने का दुख
बारिश के मौसम में यहां की स्थिति भयावह हो जाती है। सभी मौसम में कई किलोमीटर पदैल ही सफर करना पड़ता है। बरसात में पैदल दूरी अधिक हो जाती है। लेकिन बच्चों और गर्भवती महिलाओं के समय पर खुराक और टीकाकरण करने पर हमें बहुत सुकून मिलता है। उनके चेहरे पर मुस्कान देखकर हम अपनी तकलीफ भूल जाते है। भारी बारिश के दौरान ग्रामीणों के स्वास्थ्य की जांच के लिए नहीं पहुंच पाने का दुख रहता है। कई बार नदी पार करने के बाद भारी बारिश के बीच नदी-नालों में ज्यादा पानी आ जाने के कारण दो-तीन दिनों तक वहीं नदी पार गांव में रूकना पड़ता है। लेकिन गांव वाले के प्यार और स्नेह के कारण वक्त का पता नहीं चलता।

स्वास्थ्य विभाग की रूरल हेल्थ ऑगनाइजर (आरएचओ) फीमेल नर्स ब्लूरानी बैरागी, और (आरएचओ) पुरूष मेल अरविंद त्रिपाठी और मितानिन ट्रेनर अश्विनी कुकुर नदी को पार कर अपने कर्तव्य स्थल तक पहुंचें। जहां उन्होंने छोटे बच्चों को रोटा वायरस की खुराक दी। साथ ही गर्भवती महिलाओं को समय पर लगाये जाने वाले टीकाकरण किया। बच्चों को विटामिन ए की भी खुराक पिलायी।