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आखिर बस्तर के इन गांवों में क्यों नहीं मनाया जाता था आजादी का पर्व? 78 साल बाद फहराएंगे तिरंगा, जानें वजह

Independence Day 2025: छत्तीसगढ़ का बस्तर संभाग, जो दशकों से नक्सल हिंसा और डर के साए में जी रहा था, इस बार स्वतंत्रता दिवस पर एक ऐतिहासिक बदलाव देखने वाला है। आजादी के 78 साल बाद पहली बार यहां के 29 गांवों में तिरंगा फहराया जाएगा।

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78 साल बाद फहराएंगे तिरंगा (फोटो सोर्स- पत्रिका)

78 साल बाद फहराएंगे तिरंगा (फोटो सोर्स- पत्रिका)

Independence Day 2025: छत्तीसगढ़ का बस्तर संभाग, जहां बरसों तक गोलियों की गूंज और डर का साया आम जिंदगी का हिस्सा रहा, इस स्वतंत्रता दिवस पर इतिहास रचने जा रहा है। कभी जहां नक्सली झंडा फहराने पर प्रतिबंध लगाते थे, वहीं अब आजादी के 78 साल बाद उन 29 गांवों में तिरंगा शान से लहराएगा।

ये वही गांव हैं, जहां पहले नक्सलियों का दबदबा इतना गहरा था कि राष्ट्रीय पर्वों का आयोजन करना तो दूर, तिरंगा लहराने की बात भी सोचना मुश्किल था। बता दें कि यह सिर्फ राष्ट्रीय पर्व का उत्सव नहीं, बल्कि भय की जंजीरों को तोड़कर उम्मीद, साहस और बदलाव की नई सुबह का आगाज है।

डर से उम्मीद तक का सफर

बस्तर के इन इलाकों में नक्सलियों ने लंबे समय तक सरकारी व्यवस्था और राष्ट्रीय प्रतीकों के खिलाफ माहौल बनाया। वे न केवल ध्वजारोहण का विरोध करते थे, बल्कि ग्रामीणों को धमकी देकर इसमें शामिल होने से रोकते थे। कई बार ऐसे मौकों पर हिंसा भी हुई, जिससे लोगों में भय घर कर गया। पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों के लगातार अभियानों, सड़क और संचार सुविधाओं में सुधार, तथा प्रशासनिक पहुंच बढ़ने से हालात बदलने शुरू हुए। सुरक्षा बलों ने न केवल नक्सलियों को पीछे धकेला, बल्कि स्थानीय लोगों के साथ विश्वास बहाली का काम भी किया।

इस वजह से नक्सली करते थे विरोध

बस्तर संभाग के अंदरूनी इलाकों में लोग दशकों से नक्सलवाद का दंश झेल रहे है। इन इलाकों में प्रशासन की पहुंच न होने के कारण लोग नक्सलियों के तुगलकी फरमान मानने विवश थे। नक्सली देश की आजादी को झूठी आजादी बता कर इसका विरोध करते हैं।

यही कारण नक्सल दहशत के चलते प्रभावित इलाकों में राष्ट्रीय पर्व पर न तो ध्वजारोहण होता है न ही सरकारी आयोजन होते है बल्कि कई स्थानों पर नक्सली विरोध स्वरूप काला झंडा भी फहराते थे। वर्ष 2024 के बाद अब प्रभावित इलाकों की तस्वीर बदल चुकी है। सुरक्षा बलों और प्रशासन की लगातार कोशिशों, विकास कार्यों, और बदलते माहौल ने इन गांवों में विश्वास का माहौल पैदा किया है।

इन गांवों में होगा ध्वजारोहण

नारायणपुर जिले में होरादी, गारपा, कच्चपाल, कोड़लियार, कुतुल, बड़ेमाकोटी,पद्मकोट, कांदुलनार , नेलांगुर, पांगुर , रायनार में ध्वजारोहण होगा। सुकमा जिला के रायगुडेम तूमालपाड़, गोलाकुंडा, गोंमगुडा, मेट्टागुडा, उसकावाया, मुलकातोंग में तिरंगा लहराएगा। बीजापुर जिले के गांव कोंडापल्ली, जीडापल्ली, वातेबागू, कर्रेगुट्टा, पीडिया, गूंजेपर्ती, पुजारी कांकेर, भीमारम, कोरचोली,कोटपल्ली में ध्वजारोहण की तैयारी जोरों पर है। इन सभी इलाकों में पुलिस कैंप स्थापित किए गए है इन कैंपों में ही ध्वजारोहण किया जाएगा। इसके लिए पुलिस और प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की है।

स्वतंत्रता दिवस का नया सूरज

इस स्वतंत्रता दिवस पर जब इन 29 गांवों में तिरंगा लहराया जाएगा, तो यह सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं होगा, बल्कि उस डर की दीवार गिरने का प्रतीक होगा जो दशकों से खड़ी थी। गांवों में अब बच्चों की हंसी, खेलकूद, और स्कूलों में राष्ट्रीय गीतों की गूंज सुनाई देने लगी है। प्रशासन ने कार्यक्रम की पूरी तैयारी की है और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

ग्रामीणों में उत्साह

गांव के बुजुर्ग कहते हैं कि उन्होंने अपने जीवन में कभी ऐसा दिन नहीं देखा जब स्वतंत्रता दिवस खुलेआम और गर्व से मनाया जा सके। युवा पीढ़ी, जो पहले इस पर्व से कट-सी गई थी, अब इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही है। महिलाएं रंगोली और पारंपरिक सजावट कर रही हैं, जबकि बच्चे सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तैयारी में जुटे हैं। ग्रामीण न केवल ध्वजारोहण की तैयारी में जुटे हैं, बल्कि उत्साह के साथ इन आयोजनों में भाग लेने की योजना बना रहे हैं।


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