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बस्तर की प्राणदायिनी ही बन गई जगदलपुर के इस इलाके के पिछडऩे का कारण, नई सरकार से ये उम्मीद लगाए बैठी जनता

शहर में होने के बाद भी शहर पहुंचने छह किमी का सफर करना पड़ता है तय

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बस्तर की प्राणदायिनी ही बन गई जगदलपुर के इस इलाके के पिछडऩे का कारण, नई सरकार से ये उम्मीद लगाए बैठी जनता

बस्तर की प्राणदायिनी ही बन गई जगदलपुर के इस इलाके के पिछडऩे का कारण, नई सरकार से ये उम्मीद लगाए बैठी जनता

जगदलपुर. बस्तर की प्राणदायिनी माने जाने वाली इंद्रावती नदी शहर के डोंगाघाटपारा के विकास में बाधक बन गई है। वार्डवासियों का कहना है कि शहर के अन्य वार्डों का विकास तेजी से हो रहा है लेकिन उनका विकास इसलिए रुक गया है क्योंकि यह नदी की दूसरी ओर बसा है।

नेताओं ने बस वोट लिया काम नहीं किया
सालों से पुलिया की मांग कर रहे हैं लेकिन वो तो बना नहीं। नेताओं ने भी बस वोट लिया काम किया नहीं। अब ऐसे में अब नदी को ही दोष देना पड़ रहा है। उन्होंने अपना दर्द बयान करते हुए बताया कि निगम से जुड़े होने के बाद भी उन्हें शहर तक पहुंचने छह किमी का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ता है। पुलिया बन गया तो वे भी सीधे शहर से जुड़ जाते और अन्य वार्डों की तरह विकास के साथ जुड़ जाते।

नेताओं ने कई बार लगाए चक्कर
वार्ड के लोगों का कहना है कि यहां सडक़ से लेकर बिजली, पानी तक की समस्या है। सफाई तो सालों से नहीं हुई। ऐसे में अब वे गंदगी के बीच गांव का सा जीवन जी रहे हैं। शिकायत पर कार्रवाई होती नहीं। इसलिए वे इसे ही अपनी नियति मान चुके है। कई बार नेताओं के चक्कर लगा चुके यहां के परेशान लोगों ने कहा कि जब वोट लेने के लिए ही निगम में इस इलाके को जोडऩा था तो ग्रामीणों को पहले बता देते।

नई सरकार के बावजूद भी रही ऐसी स्थिति तो होगा आंदोलन
यह बेहद शर्मनाक है कि वे शहर के गांव में रहते हैं। उन्होंने कहा कि नई सरकार बनने के बाद उनकी उम्मीद जगी है कि उनका विकास होगा और अन्य वार्डों की तरह यहां भी बुनियादी सुविधाएं पूरी होंगी। यदि इस सरकार में भी पहले जैसी स्थिति बनी रहती है तो यहां के लोगा आंदोलन करेंगे। साथ ही जब तक पुलिया और बुनियादी सुविधा नहीं मिल जाती तब तक नेताओं का विरोध किया जाएगा। वार्डवासियों का कहना है कि मांगे पूरी नहीं हुई तो वे निगम क्षेत्र से अलग करने के लिए भी आंदोलन कर सकते हैं।