माओवादी वजह से विभाग का कोई भी व्यक्ति जंगल के अंदर नहीं जाना चाहता। यहां जाना खतरे से खाली नहीं है। इस वजह से बाघों के संरक्षण के प्रयास उस तरह से नहीं हो रहे हैं जैसे होने चाहिए। विभाग ने मोबाइल के जरिए भोपालपटनम व कुटरू में चौकी बनाकर गश्ती की योजना बनाई है।