
एमसी मैरीकॉम ने मशाल उठाकर बस्तर ओलंपिक का शुभारंभ किया ( Photo - DPR Chhattisgarh )
Bastar Olympics 2025: मुक्केबाजी की वर्ल्ड चैंपियन और लंदन ओलंपिक की ब्रॉन्ज मेडलिस्ट एमसी मैरीकॉम ने बस्तर ओलंपिक की मशाल उठाकर स्पर्धा का शुभारंभ किया। इस दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और कैबिनेट के मंत्री मौजूद रहे। बता दें कि बस्तर ओलंपिक में इस बार बस्तर के सातों जिले से आए 3500 खिलाड़ी खेल में हिस्सा लेंगे। वहीं 7 टीमों में समर्पित नक्सलियों और नक्सल प्रभावित 761 ग्रामीण भी शामिल है।
आईजी सुंदरराज पी. के अनुसार बस्तर ओलंपिक में सात जिलों की सात टीमें भाग ले रही हैं, इनके अलावा एक विशेष टीम ‘नुआ बाट’ की है। यह टीम उन समर्पित नक्सलियों और नक्सल हिंसा प्रभावित ग्रामीणों की है जिन्होंने समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है। बस्तर की आंचलिक बोली में नुआ बाट का अर्थ है नया रास्ता। वर्ष 2024 में 300 से अधिक प्रतिभागियों ने इस श्रेणी में हिस्सा लिया था, जबकि इस वर्ष यह संख्या बढ़कर 761 हो गई है। यह बस्तर ओलंपिक का सबसे विशेष और प्रेरणादायक आकर्षण बन रहा है।
एक समय हिंसा और भय से घिरा रहने वाला बस्तर अब तेजी से बदल रहा है और इस परिवर्तन का सबसे चमकदार उदाहरण है बस्तर ओलंपिक्स 2025। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मंगलवार को आयोजित कार्यक्रम में कहा कि “जो बस्तर कभी लाल आतंक की पहचान से जाना जाता था, आज वही बस्तर युवाओं की ऊर्जा, खेल प्रतिभा और सकारात्मक बदलाव का केंद्र बन चुका है।” मुख्यमंत्री के अनुसार, इस वर्ष आयोजित दूसरे संस्करण में खिलाड़ियों की भागीदारी में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार दोगुने से भी अधिक खिलाड़ी प्रतियोगिता में शामिल हुए हैं, जो दर्शाता है कि बस्तर के युवाओं में खेल के प्रति उत्साह और बेहतर भविष्य बनाने की आकांक्षा लगातार बढ़ रही है।
बस्तर ओलंपिक का समापन 13 दिसंबर को होगा और इस दौरान गृहमंत्री अमित शाह मौजूद रहेंगे। बस्तर ओलेंपिक का यह दूसरा साल है। पिछले साल भी अमित शाह इस आयोजन के लिए बस्तर आए थे और बस्तर के अलग-अलग जिलों से आए आदिवासी युवाओं का हौसला बढ़ाया था। कमिश्नर डोमन सिंह, ने बताया कि ब्लॉक और जिला स्तर पर सफलता के बाद यह प्रतियोगिता अब 11 से 13 दिसंबर तक संभाग मुख्यालय में आयोजित की जा रही है। इस मंच पर 3 हजार 500 ग्रामीण खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे, जिनमें 761 समर्पित नक्सली एवं हिंसा पीडि़त खिलाड़ी भी शामिल हैं। बस्तर ओलंपिक सिर्फ खेल आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक सद्भाव, पुनर्वास और शांति की दिशा में बढ़ते बस्तर की नई तस्वीर है।
अमित शाह के दौरे से पहले एयरपोर्ट से इंदिरा स्टेडियम तक की सुरक्षा काफी बढ़ा दी गई है। जवान स्नीफर डॉग लेकर पूरे ग्राउंड को स्कैन कर रहे हैं। जमीन से आसमान तक से निगरानी की जा रही है। फोर्स की नजर हर संदिग्ध गतिविधि पर है। 13 दिसंबर के दिन इंदिरा स्टेडियम की सुरक्षा और बढ़ा दी जाएगी। शहर के सुरक्षा ग्रिड में बड़े बदलाव किए जा रहे हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 13 दिसंबर को बस्तर ओलंपिक के समापन में शामिल होने के लिए बस्तर दौरे पर आ रहे हैं। यह दौरा उस डेडलाइन से ठीक 108 दिन पहले हो रहा है, जिसमें 31 मार्च 2026 तक बस्तर में नक्सलवाद के पूर्ण उन्मूलन का लक्ष्य तय किया गया है। शाह की प्रस्तावित यात्रा को इस लक्ष्य से जोड़कर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पिछली बार भी बस्तर ओलंपिक के लिए शाह बस्तर आए थे। तब उन्होंने ओलंपिक के मंच से ही नक्सलवाद के खात्मे की डेडलाइन दोहराई थी।
बीते एक साल में बस्तर में बहुत कुछ बदल चुका है इसलिए उनका 13 दिसंबर का दौरा भी खास रहने की संभावना है। शाह लगभग दो महीने के भीतर दूसरी बार बस्तर पहुंच रहे हैं। इससे पहले वे मुरिया दरबार के लिए 4 अक्टूबर को आए थे। पिछले एक साल में बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई में निर्णायक बढ़त मिली है।
सुरक्षा बलों ने कई इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत की है, जहां पहले नक्सलियों का प्रभाव माना जाता था। दंतेवाड़ा, नारायणपुर, बीजापुर और बस्तर के जंगलों में सुरक्षा कैम्पों का विस्तार, सड़क और संचार नेटवर्क में सुधार तथा स्थानीय युवाओं की बढ़ती भागीदारी ने इलाके की सुरक्षा तस्वीर को बदल दिया है।
Updated on:
11 Dec 2025 05:51 pm
Published on:
11 Dec 2025 05:38 pm

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