script कैश या क्रेडिट-डेबिट कार्ड हुआ पुराना, अब स्कैन का है जमाना | Cash or credit-debit card becomes old | Patrika News

कैश या क्रेडिट-डेबिट कार्ड हुआ पुराना, अब स्कैन का है जमाना

locationजगदलपुरPublished: Nov 18, 2023 05:19:20 pm

Submitted by:

Kanakdurga jha

डिजिटल युग में आज सब कुछ बदलता जा रहा है।

कैश या क्रेडिट-डेबिट कार्ड हुआ पुराना
कैश या क्रेडिट-डेबिट कार्ड हुआ पुराना
जगदलपुर। डिजिटल युग में आज सब कुछ बदलता जा रहा है। कुछ समय पहले बाजार जाते समय जेब में खरीददारी के लिए लोग रुपये लेकर चलते थे। कई बार चिल्हर की किल्लत भी होती थी। आज कैश और एटीएम कार्ड के बाद जिंदगी स्कैन पर जा पहुंची है। अब तो युवा घर से निकलते समय पर्स लेकर ही नहीं निकलते। अब पर्स की जगह स्मार्ट फोन ने ले लिया है। स्कैन पर जिंदगी इतनी निर्भर हो गई है कि लोगों की एटीएम पर निर्भरता नहीं रही।
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सिर्फ रकम भुगतान करें, वर्ना भुगतना पड़ सकता है : स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने अपने ग्राहकों के लिए एक अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि भुगतान लेने के लिए किसी भी क्यूआर कोड को स्कैन न करें। नहीं तो आपका खाता खाली हो जाएगा। क्यूआर कोड को भुगतान देने के लिए स्कैन किया जाता है, न कि भुगतान लेने के लिए।
अब जमाना बदल गया है। कब क्यू आर कोड का जमाना हो गया है। अब डेबिट और क्रेडिट कार्ड भी बीते जमाने की बात हो जाएगी। पान ठेले से लेकर किराने की दुकान तक स्कैन पर भुगतान होने लगा है। अब कहीं चिल्हर के लिए कोई परेशान होते दिखाई नहीं देता। सैकड़ो से लेकर लाखों की खरीदी अब स्कैनिंग से होने लगे हैं।
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50 फीसदी बढ़ा ऑनलाइन ट्रांजेक्शबैंकिंग से जुड़े जानकारों के अनुसार आजकल युवा स्व लेकर बूढ़े तके ऑनलाइन ट्रांजेक्शन से भुगतान कर राहे हैं। 50 से लेकर 60 साल वाले व्यक्ति इस तकनीक को समझने में रूचि ले रहे हैं। जबकि 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोग अभी भी नकद लेन-देन में विश्वास करते हैं। सुरक्षा की दृष्टि से वे इस तकनीक को महत्व नहीं देते। ऑनलाइन ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के लिए कुछ कंपनियां तो बोनस प्वाइंट भी दे रही हैं। धरमपुरा स्थित किराना कारोबारी नारायण नागवानी बताते हैं कि उनके यहां कस्टमर 40 प्रतिशत से अधिक भुगतान ऑनलाइन करते हैं। इससे चिल्लर रखने की समस्या बहुत हद तक खत्म हो गई है।
सब कुछ स्कैन पर निर्भर

- कोई भी भुगतान करने से पहले यूटीआई आईडी सत्यापित करें।

- भुगतान करते समय कुछ सुरक्षा नियमों का पालन किया जाना चाहिए।

- यूपीआई पिन केवल भुगतान के लिए आवश्यक है, भुगतान प्राप्त करने के लिए नहीं।
- पैसे भेजने से पहले हमेशा मोबाइल नंबर, नाम और यूपीआई आईडी सत्यापित करें।

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विकास नगर स्टेडियम का अस्तित्व खतरे में, जगह-जगह गिट्टी व कीले

कोण्डागांव। जिला मुख्यालय स्थिति विकास नगर स्टेडियम में होने वाले खेल गतिविधियों के आलावा अन्य आयोजनों के चलते कही यह स्टेडियम कही ऐसा न हो कि, यह अपना अस्तिव ही खो दे। खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए खेल एवं युवा कल्याण विभाग के साथ ही विभिन्न योजनाओं के राशि के माध्यम से सजाये व संवारे गए इस विकास नगर स्टेडियम में आए दिन खेल गतिविधियों के आलावा अन्य आयोजन होते रहते है।
राजनीतिक सभा से लेकर मेला मड़ई भी

जिला मुख्यालय में स्टेडियम को ही खेल के लिए सबसे सुरक्षित जगह माना जाता है, और शायद यही वजह है कि, इस स्टेडियम में रोजाना बड़ी संख्या में खिलाड़ियों के साथ ही अन्य लोग भी हल्की-पुल्की जॉकिंग के लिए यहॉ आते है। लेकिन पिछले दिनों हुए हुए राजनीतिक आयोजनों के चलते यहां कई निर्माण कार्य करवाए तो गए, लेकिन आयोजन के होते ही जिम्मेदारों ने मुह ही मोड़ लिया है।

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