
जब सिनेमा में दिखा बस्तर के चुनाव का संघर्ष
जगदलपुर पत्रिका @ आकाश मिश्रा। Chhattisgarh Election 2023: सूबे में चुनावी सरगर्मी इन दिनों चरम पर है, लेकिन हर बार की तरह बस्तर के चुनावों पर पूरे देश की नजर है। नक्सल प्रभावित बस्तर में चुनाव की सफलता हमेशा से चुनौती रही है। बस्तर के चुनाव का संघर्ष जब देश के सिनेमा तक पहुंचा तो उसे दर्शकों ने खूब देखा। 2017 में आई हिंदी फिल्म न्यूटन तो ऑस्कर तक के लिए नॉमिनेट हुई थी। इसमें अभिनेता राजकुमार राव को नक्सल प्रभावित इलाके में चुनाव करवाने के लिए संघर्ष करते दिखाया गया।
वहीं अभिनेता पंकज त्रिपाठी फिल्म में एक सीआरपीएफ अफसर की भूमिका में थे जिन्होंने अपने रोल के जरिए देश-दुनिया को बताया कि बस्तर में रह रहे जवानों का जीवन कितना संघर्षपूर्णं है। इसके बाद साल 2019 में मलयाली फिल्म उंडा यानी बुलेट आई और इस फिल्म को भी दर्शकों का प्यार मिला। फिल्म की कहानी कोण्डागांव जिले पर आधारित थी, जिसमें केरल में हाल ही में प्रशिक्षित हुए पुलिसकर्मियों की एक टीम को एसआई मणिकंदन के नेतृत्व में चुनाव ड्यूटी के लिए बस्तर भेजा जाता है। फिल्म में दिखाया गया था कि किस तरह से चुनाव ड्यूटी में आने वाली फोर्स के जवान सीमित गोला-बारूद के बीच खुद की और लोकतंत्र की रक्षा करते हैं। फिल्म में एसआई मणिकंदन का रोल मलयाली फिल्मों के सुपर स्टार मामूट्टी ने निभाया था। यह फिल्म कोण्डागांव जिले के आसपास ही 2018 में शूट हुई थी। फिल्म आठ करोड़ रुपए में बनी थी और इसने 38 करोड़ रुपए की कमाई की थी।
न्यूटन की टीम बस्तर के रियल लोकेशन पर शूट के लिए नहीं हुई तैयार
बस्तर के धुर नक्सल प्रभावित इलाके में वोटिंग करवाने की चुनौती पर बनी न्यूटन फिल्म बस्तर के रियल लोकेशन पर शूट नहीं हुई है, इसे दल्ली राजहरा में शूट किया गया था। दरअसल फिल्म की रिसर्च टीम जब यहां कहानी पर रिसर्च कर रही थी तो उसने यहां के नक्सल खतरे को करीब से देखा। इसी वजह से फिल्म को दल्ली राजहरा में शूट करने का निर्णय लिया गया। 2015 में बस्तर में नक्सलवाद की स्थिति आज के जैसी नहीं थी, तब यहां ज्यादा खतरा था।
न्यूटन की कहानी में थी तब के बस्तर की सच्चाई
न्यूटन फिल्म 2013 से 2015 के बीच हुए रिसर्च पर बनी थी। तब के बस्तर के हालात के आधार पर फिल्म की कहानी में बताया गया कि किस तरह न्यूटन कुमार(राजकुमार राव) जो कि दलित समुदाय से है और नया-नया सरकारी क्लर्क बना है। उसे चुनावी ड्यूटी पर नक्सल प्रभावित जंगली इलाके में भेजा गया है। सुरक्षा बलों की उदासीनता और नक्सली छापामारों के हमले के संभावित खतरों के बीच तमाम विपरीत परिस्थितियों में वो अपनी ओर से निष्पक्ष मतदान करवाने की कोशिश करता है, लेकिन बावजूद इसके जब मतदाता मतदान के लिए नहीं आते तो उसे ये देखकर घोर निराशा होती है।
केरल में खबर पढ़ी और बना डाली उंडा
मैंने 2016 में केरल के एक अखबार में एक खबर पढ़ी, जिसमें बताया गया था कि किस तरह से केरल के पुलिस वालों की एक टीम को बस्तर में चुनाव करवाने में संघर्ष करना पड़ा। इसी के बाद इस विषय पर मुझे फिल्म बनाने का ख्याल आया और फिर बस्तर पर एक साल तक रिसर्च के बाद 2018 में मैंने फिल्म बनाना शुरू किया। 2019 में फिल्म रिलील हुई। फिल्म कोण्डागांव जिले में शूट हुई, इसमें यहां के स्थानीय कलाकार भी थे। फिल्म में बस्तर का स्थानीय संगीत भी था। - खालिद रहमान, निर्देशक, उंडा
न्यूटन और उंडा के बाद अब बस्तर आने वाली है
बस्तर अब देश के सिनेमा को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है, यहां की नक्सल समस्या को देश-दुनिया तक पहुंचाने के लिए न्यूटन और उंडा के बाद अब एक और फिल्म बस्तर आने वाली है। इस फिल्म को केरला स्टोरी के डायरेक्टर ही बना रहे हैं। यह फिल्म भी रोचक होगी। अगले साल अप्रैल में यह रिलीज होगी। बस्तर की कहानी जिस तरह से मीडिया के माध्यम से देश-दुनिया तक पहुंच रही है, उससे फिल्म इंडस्ट्री का ध्यान यहां के मुद्दों की ओर गया है। - हेमंत पाणीग्राही, फिल्मों के जानकार
Updated on:
20 Oct 2023 05:32 pm
Published on:
20 Oct 2023 05:30 pm
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