
CG News: मेडिकल कॉलेज डिमरापाल में डॉक्टरों की अथक मेहनत और परिवार वालों के प्रयास ने ९ वर्षीय प्रकाश की जिंदगी बचा ली, जो करंट लगने के बाद कोमा में चला गया था। 20 घंटे वेंटिलेटर पर रहने और छह दिन तक आठ डॉक्टरों की टीम की 24 घंटे निगरानी के बाद प्रकाश ने मौत को मात दी।
छठे दिन उसे अस्पताल से छुट्टी मिली और वह अब परिवार वालों के साथ सामान्य जीवन बीता रहा है। प्रकाश के परिजनों की त्वरित सूझबूझ और डॉक्टरों की मेहनत ने उनके बेटे को नया जीवन दिया। समय पर अस्पताल पहुंचने से जान बच गई।
मेकाज से मिली जानकारी के अनुसार जैसे की प्रकाश को करंट लगा उसकी सांस रूक गई थी। इस स्थिति को देख परिजन बेहद घबरा गए। लेकिन उन्होंने हिम्मत दिखाई और तुरंत ही मुंह से सांस और चेस्ट कंप्रेशन देना शुरू किया। अच्छी बात यह रही कि इस दौरान बच्चे की सांस लौट आई। इसके बाद परिजन सीधे मेकाज की तरफ दौड़े।
मेकाज अधीक्षक डॉ अनुरूप साहू के मुताबिक अस्पताल में प्रकाश को तुरंत वेंटिलेटर पर रखा गया। आठ डॉक्टरों की विशेषज्ञ टीम ने छह दिन तक 24 घंटे उसकी स्थिति की निगरानी की। इस तरह कीरब पूरे छह दिन तक हर घंटे में प्रकाश की जांच की जाती थी और उनकी रिपोर्ट ली जाती थी। पहले तीन दिन बेहद नाजुक थे, लेकिन तीसरे दिन प्रकाश खतरे से बाहर निकला।
मेकाज के अधीक्षक डॉ अनुरूप साहू ने बताया कि केशलूर के मुरुमगुड़ा निवासी इंदर कश्यप अपने बेटे को लेकर बदहवास स्थिति में मेडिकल कॉलेज पहुंचे थे। इस दौरान बच्चें की स्थिति बेहद गंभीर थी। दरअसल प्रकाश को हाई-वोल्टेज करंट का झटका लगा, जिससे वह बेहोश हो गया।
CG News: ऐसे में वे किसी तरह तुरंत बच्चे को लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंचे। यहां उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए तुरंत वेंटिलेटर में रखा गया। मासूम करीब 20 घंटे तक वेंटिलेटर पर रहा, जिसके बाद उसकी तबीयत में सुधार आना शुरू हुआ। इसे देख डॉक्टरों ने भी राहत की सांस ली। लगातार मॉनिटरिंग के बाद आखिरकार छह दिन में प्रकाश की स्थिति सामान्य हुई। जिसके बाद उसे डिस्चार्ज कर दिया गया है।
Published on:
07 May 2025 12:56 pm
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