
CG News: छत्तीसगढ़-तेलंगाना बॉर्डर पर स्थित कर्रेगुट्टा पहाड़ पर पिछले 17 दिनों से फोर्स का ऑपरेशन जारी है। इस बीच नक्सली चार बार पत्र जारी कर शांति वार्ता की मांग कर चुके हैं। तेलंगाना ने तो अंतिम पत्र पर प्रतिक्रिया दी है लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार का सख्त रुख बरकरार है। इस बीच नक्सलियों प्रवक्ता जगन ने प्रेस नोट जारी करते हुए युद्ध विराम का ऐलान किया है।
छह महीने तक युद्ध विराम किए जाने की घोषणा की है। पहले नक्सली दोनों ओर से युद्ध विराम करने की बात कह रहे थे। इस बार उन्होंने अपनी ओर से इसकी घोषणा कर दी है। दरअसल जगन ने तेलुगु भाषा मे प्रेस नोट जारी किया है। जिसमें लिखा है कि तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी, पूर्व सीएम चंद्रशेखर राव और कविता ने भी शांति वार्ता के लिए पहल की थी। ये गर्व की बात है। तेलंगाना सरकार की पहल की नक्सलियों ने सराहना की है।
शांति वार्ता के लिए शांति समिति का भी गठन किया गया था। लिखा है कि राज्य के कई बुद्धिजीवी वर्ग और मशहूर हस्तियां इसी मुद्दे पर अभियान चला रहे हैं। वार्ता प्रक्रिया को राज्य और देश में लोकतांत्रिक माहौल लाने के प्रयास के रूप में समझा जाना चाहिए। इन प्रयासों को सकारात्मक प्रभाव देने के लिए 6 महीने तक युद्धविराम की घोषणा कर रहे हैं।
छत्तीसगढ़ में लगातार जारी ऑपरेशन की वजह से नक्सली भारी दबाव में है। वे लगातार सरकार से ऑपरेशन बंद करने की मांग कर रहे हैं। लगातार चार पत्रों के बाद भी हालात सामान्य नहीं हुए तो अब पांचवें पत्र में नक्सलियों ने युद्ध विराम की घोषणा की है। सरकार से शांति वार्ता के लिए नक्सलियों ने अब तक कुल 4 पत्र जारी किए हैं।
इससे पहले नक्सलियों के केंद्रीय कमेटी के प्रवक्ता अभय ने दो बार और नक्सलियों के सब जोनल ब्यूरो रूपेश ने दो बार पत्र जारी किया था। वहीं अब जगन का यह 5वां पत्र है, जिसमें 6 महीने तक युद्धविराम की घोषणा करने की बात लिखी हुई है। राज्य सरकार की ओर से इस पत्र को लेकर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि सरकार का रुख स्पष्ट है।
CG News: नक्सलियों की तरफ से लगातार युद्ध विराम की बात कही जा रही है लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार का रुख स्पष्ट और सख्त है। गृहमंत्री विजय शर्मा कह चुके हैं कि जब बस्तर में निर्दोष मारे जा रहे थे तब शांति की पैरवी क्यों नहीं की गई। अब जब सरकार प्रहार कर रही है तो नक्सलियों को क्यों बचाया जा रहा है। सरकार सफाए के निर्णय के साथ आगे बढ़ रही है और उसे लगातार सफलता भी मिल रही है। छत्तीसगढ़ की तरफ से शांति वार्ता और युद्ध विराम जैसे हालात बनते नजर नहीं आ रहे हैं।
Published on:
10 May 2025 10:42 am
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