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Chhattisgarh Crime: बस्तर में गुमशुदगी के चौंकाने वाले आंकड़े, कांकेर-जगदलपुर में सबसे ज्यादा केस

Chhattisgarh Crime: कांकेर और जगदलपुर में सबसे अधिक केस दर्ज हुए हैं, जिससे बेटियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बढ़ गई है।

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बेटियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता (photo source- Patrika)

बेटियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता (photo source- Patrika)

Chhattisgarh Crime: बस्तर संभाग में युवतियों और महिलाओं के लापता होने तथा बहला-फुसलाकर ले जाने के मामलों में लगातार बढ़ोतरी ने समाज और प्रशासन दोनों के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। वर्ष 2023 से 2026 के बीच कुल 687 प्रकरण दर्ज होना इस बात का संकेत है कि यह समस्या अब एक व्यापक सामाजिक संकट का रूप ले चुकी है।

Chhattisgarh Crime: गिरावट भी इन मामलों को बढ़ावा दे रही

रोजगार के तलाश में भी ग्रामीण क्षेत्र की युवतियां बगैर बताएं तेलंगाना, आन्ध्रप्रदेश, ओडि़शा और महाराष्ट्र चली जाती हैं। जिनके गुमशुदगी की रिपोर्ट परिजन पुलिस थानों में किए जाते हैं। वहीं कुछ मामले प्रेम-प्रसंग के भी होते हैं। प्रशासन और समाज दोनों के संयुक्त प्रयासों से ही इस गंभीर समस्या पर नियंत्रण पाया जा सकता है। जागरूकता, सतर्कता और समय पर कार्रवाई ही इसका प्रभावी समाधान है।

बस्तर संभाग के पुलिस थानों में विगत तीन साल के दौरान गुमशुदगी के दर्ज प्रकरण अनुसार, सबसे अधिक 215 मामले जगदलपुर में दर्ज हुए हैं। इसके अलावा कांकेर में 203, कोण्डागांव में 113, सुकमा में 44, दंतेवाड़ा में 41, नारायणपुर में 38 और बीजापुर में 33 मामले दर्ज किए गए हैं। ये आंकड़े न केवल चिंताजनक हैं, बल्कि समाज में बढ़ते असुरक्षा के भाव को भी उजागर करते हैं।

सर्वाधिक प्रकरण कांकेर और जगदलपुर जिले में दर्ज किए गए हैं। इन घटनाओं के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं, जिनमें सोशल मीडिया के माध्यम से झांसा देना, प्रेम प्रसंग के नाम पर बहकाना, तथा मानव तस्करी जैसे संगठित अपराध भी शामिल हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता की कमी और सामाजिक सतर्कता में गिरावट भी इन मामलों को बढ़ावा दे रही है।

परिवारिक जिम्मेदारी

विशेषज्ञों का कहना है, परिवारों की जिम्मेदारी इस संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। अभिभावकों को चाहिए कि वे अपने बच्चों, विशेषकर किशोरियों, के साथ संवाद बनाए रखें। उनके मित्रों, गतिविधियों और ऑनलाइन व्यवहार पर संतुलित नजर रखें। भावनात्मक सहयोग और विश्वास का माहौल बच्चों को गलत दिशा में जाने से रोक सकता है।

पुलिस और श्रम विभाग की अहम भूमिका

पुलिस विभाग इन मामलों में लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहा है। गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज होते ही जांच शुरू की जाती है और साइबर सेल की मदद से लोकेशन ट्रेस की जाती है। कई मामलों में त्वरित कार्रवाई से युवतियों को सुरक्षित बरामद भी किया गया है, जो सराहनीय प्रयास है। बालिकाओं के लिए ‘‘ऑपरेशन मुस्कान’’ और महिलाओं के लिए ‘‘ऑपरेशन तलाश’’ चलाया जा रहा है। शिकायत के बाद पुलिस विभाग की ओर से तत्परता दिखाते हुए अधिकांश लापता बेटियों को परिवार के सुपूर्द किया जाता है, वहीं श्रम विभाग की ओर से मानव तस्करी के शिकार बेटियों की घर वापसी संभव हो पाती है।

Chhattisgarh Crime: सोशल मीडिया का जाल, संगठित अपराध

सोशल मीडिया आज इन घटनाओं का प्रमुख माध्यम बनता जा रहा है। फर्जी पहचान बनाकर युवतियों को प्रेम जाल में फंसाना आम हो गया है। ऑनलाइन दोस्ती धीरे-धीरे विश्वास में बदलकर उन्हें घर छोडऩे के लिए प्रेरित करती है। इस प्रकार के मामलों में डिजिटल सतर्कता और जागरूकता बेहद जरूरी है।