1 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

यहां बच्चे पढऩे तो आते हैं लेकिन दहशत में, डर के साए में करते हैं शिक्षा ग्रहण, जानिए क्या है कारण

इसे सरकारी लापरवाही (Government negligence) कहे या फिर कागजी कार्रवाईयों (Paperwork) में हो रही देरी जहां एक ओर शासन-प्रशासन स्कूलों (School) में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा (Education) को बढ़ावा देने की बात कह रहा हैं।

2 min read
Google source verification
education news

यहां बच्चे पढऩे तो आते हैं लेकिन दहशत में, डर के साए में करते हैं शिक्षा ग्रहण, जानिए क्या है कारण

कोण्डागांव/शामपुर. Education News : इसे सरकारी लापरवाही कहे या फिर कागजी कार्रवाईयों में हो रही देरी जहां एक ओर शासन-प्रशासन स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने की बात कह रहा हैं। तो वहीं दूसरी ओर इसके विपरित विकासखंड माकड़ी के शामपुर हायर सेंकड्री स्कूल के सालो पुराने भवन जो अब जर्जर हो चुका हैं, जहां आज भी कक्षाए संचालित हो रही है। जानकारी के मुताबिक यह स्कूल इलाके का सबसे पुराना स्कूल है, जिसकी शुरूवात सन 1989 में हाईस्कूल के रूप में हुई थी और वर्ष 1996 में इसे हायर सेकेंडरी में उन्नयन किया गया था।

Kondagaon News

उन्नयन होने के बाद आज तक यहां हायर सेंकड्री की कक्षाओं के लिए भवन नहीं बन पाया हैं। यही वजह है कि उन्नयन होने के बाद से यहां आज भी नियमित कक्षाए पुराने हाईस्कूल भवन में ही संचालित हो रही हैं। भवन पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है, दीवारे भी भरभराने के साथ ही कई जगहों पर दर्रारे देखी जा सकती है। हालंाकि यहां एक जगह मरम्मत करवाने से दूसरी जगह पर उखडऩे लग जाता है। भवन में लगे खिडक़ी दरवाजे समेत स्कूल के मुख्य द्वार में लगा चैनल गेट भी खराब हो चुका है।

कक्षाओं में छत से टपकता है पानी
स्कूल भवन की छत भी पूरी तरह खराब हो चुकी है, बारिश के चलते यहां ने कमरों में पानी टपकने लगता हैं। वहीं प्रयोगशाला कक्ष का छत भी जर्जर हो चुका है। जिससे बारिश के दिनों में यहां न तो प्रयोग करने बनता है और नही यहां कोई सामान ही रखा जा सकता हैं। स्कूल में खेल मैदान का भी अभाव है वैसे जमीन दान में मिल तो चुका है, लेकिन उसमे जरूत से ज्यादा पेड़-पौधे है जिसको काटना फि लहाल सरकारी कार्यवाही के सम्भव नही है। जिसके चलते यहां अध्यनरत बच्चों को खेलने का मौका भी नहीं मिल पा रहा हैं। विद्यालय में लगभग 530 छात्र-छात्राएं अध्यनरत है विद्यालय तो पुराना है, लेकिन कला और विज्ञान दो ही संकाय आज भी संचालित हो रही हैं। इस स्कूल में भवन की कमी के साथ साथ शिक्षकों की भी कमी आज भी बनी हुई हैं। यहां तक कि चौकीदार की भी नियुक्ति अब तक नहीं हो पाई हैं।