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सबसे बड़ा जैविक कृषि क्षेत्र वाला जिला बनेगा दंतेवाड़ा

65 हजार हेक्टेयर रकबे को जैविक कृषि क्षेत्र घोषित करने की अनुशंसा, विशेषज्ञ समिति ने जिले में चल रही जैविक खेती और इसे बढ़ावा देने के प्रयास पर संतुष्टि जताई

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बैठक से पहले गांवों का दौरा कर किसानों से चर्चा करते समिति के सदस्य

बैठक से पहले गांवों का दौरा कर किसानों से चर्चा करते समिति के सदस्य

दंतेवाड़ा. जैविक कृषि के क्षेत्र में दंतेवाड़ा जिले ने बड़ी छलांग लगाई है। जिले के 65 हजार हेक्टेयर से अधिक रकबे को पूर्णत: जैविक कृषि क्षेत्र घोषित करने की अनुशंसा वृहद क्षेत्र प्रमाणीकरण के लिए गठित विशेषज्ञ समिति ने कर दी है। भारत सरकार के अनुमति मिलने पर दंतेवाड़ा जिले के 110 गांव में 65 हजार हेक्टेयर से अधिक रकबे का जैविक कृषि क्षेत्र प्रमाणित देश का सबसे बड़ा क्षेत्र होगा। वर्ष 2013 से दंतेवाड़ा को जैविक कृषि जिला बनाने की तैयारी चल रही है। बीते 9 साल से जिले में रासायनिक उर्वरकों व कीटनाशकों की बिक्री व इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगाई जा चुकी है। प्रमाणीकरण के लिए गठित विशेषज्ञ समिति की बैठक बुधवार को जिला कार्यालय दंतेवाड़ा में हुई, जिसमें पावर पाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से परम्परागत कृषि से संबंधित व जैविक खेती को बढ़ावा देने किए गए प्रयासों को समिति के समक्ष रखा गया। बैठक में डॉ. अय्याज फकीर तंबोली, संचालक कृषि व राज्य शासन के विशेष सचिव की अध्यक्षता में कलेक्टर विनीत नंदनवार सहित समिति के सदस्य मौजूद थे। वर्चुअल रूप से निदेशक एनसीओएनएफ भारत सरकार, डॉ गगनेश शर्मा, सलाहकार कृषि मंत्रालय भारत सरकार डॉ. अशोक यादव, अपेडा, भारत सरकार के सौरभ अग्रवाल, अशोक वोरा, जुड़े रहे। समिति में शामिल विशेषज्ञों ने बैठक के एक दिन पहले जिले के झोड़िया बाड़म, बिंजाम, कटुलनार, भटपाल, कृषि विज्ञान केंद्र समेत विभिन्न गांवों का दौरा कर जैविक खेती का अवलोकन किया और किसानों से बातचीत भी की थी।
समिति के अध्यक्ष डॉ तंबोली ने कहा कि कई वर्षों के प्रयास से आज जिला जैविक खेती की ओर निरंतर बढ़ रहा है। उत्पादकता वृद्धि के साथ अब स्टोरेज, पैकेजिंग और प्रोसेसिंग करने से बाजारों में उत्पादों की अच्छी मांग होगी। शासन की महत्वाकांक्षी योजना नरवा, गरवा घुरवा बाड़ी किसानों को परम्परागत कृषि की ओर ले जाने एवं जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से बचाने के लिये मील का पत्थर साबित होगी। कलेक्टर विनीत नंदनवार ने कहा कि इस लंबी प्रक्रिया में सभी का प्रयास महत्वपूर्ण रहा है। हमारे जैविक उत्पादों को बेहतर बाजार मिले, इसके लिए जिला प्रशासन प्रतिबद्ध है। जैविक प्रमाणीकरण के बाद कृषकों को अपनी उपज के लिये एक बड़ा बाजार मिल पायेगा।
भारत सरकार के प्रतिनिधि व क्षेत्रीय जैविक, प्राकृतिक खेती केन्द्र जबलपुर के क्षेत्रीय निदेशक डॉ अजय सिंह राजपूत ने समिति के साथ सभी पहलुओं पर विस्तृत रूप से चर्चा कर तकनीकी व व्यवहारिक बिन्दुओं पर मार्गदर्शन दिया। बैठक में सेंटर फॉर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर हैदराबाद से डॉ. जी. राजशेखर, पी. चन्द्रकला, समिति सदस्य सचिव बीज प्रमाणीकरण एवं जैविक प्रमाणीकरण संस्था रायपुर के प्रबंधक संचालक ए.बी. आसना, संचालक पशु चिकित्सा रायपुर अपर संचालक डॉ. के.के. ध्रुव, उप संचालक उद्यान मनोज अम्बस्ट, सी.जी. सर्ट क्वालिटी मैनेजर राजेन्द्र कुमार यादव, उप संचालक मत्स्य डी. के. सिंह कृषि विभाग संयुक्त संचालक कृषि एम.डी. एव. इंदिरा गांधी कृषि महाविद्यालय रायपुर डीन कृषि महाविद्यालय रघुनाथ सिंह नेताम सतीश अवस्थी, सहायक संचालक कृषि, संचालनालय कृषि, आकाश बड़ावे, भूमगादी व जिले से संबंधित अधिकारी मौजूद थे।

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