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जेल की रोटी का अफसर भी चखते है स्वाद..राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित हवलदार अब्दुल जाहिद खान ने बताई ऐसी बातें

Jagdalpur News : कहते हैं कि ऐसा कोई काम न करो कि जेल जाने की नौबत आ जाए, बड़े बुजुर्ग अक्सर यह बातें समझाते रहते हैं।

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जेल की रोटी का अफसर भी चखते है स्वाद..राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित हवलदार अब्दुल जाहिद खान ने बताई ऐसी बातें

जेल की रोटी का अफसर भी चखते है स्वाद..राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित हवलदार अब्दुल जाहिद खान ने बताई ऐसी बातें

अजय श्रीवास्तव

Jagdalpur News : कहते हैं कि ऐसा कोई काम न करो कि जेल जाने की नौबत आ जाए, बड़े बुजुर्ग अक्सर यह बातें समझाते रहते हैं। इसके बाद भी कभी किसी छोटे मोटे अपराध के लिए जेल की सजा हो जाती है तो यह कहकर सांत्वना दी जाती है कि इसकी किस्मत में लिखा था इसलिए अब जेल की रोटी तोड़नी पडे़गी। जेल की रोटी तोड़ने वाली बात लोगों के दिलोदिमाग में इस कदर घर कर गई है कि कुछ लोग गाहे-बगाहे जेल की रोटी खाने के लिए लालायित रहते हैं।

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मान्यता है कि अगर आप जेल की रोटी का एक टुकड़ा भी खाने को पा जाते हैं कि तो भविष्य में जेल जाने से बच सकते हैं। राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित और जगदलपुर जेल में पदस्थ हवलदार अब्दुल जाहिद खान ने पत्रिका से इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि आम और खास दोनों तरह के लोग जेल स्टाफ से रोटी के फरमाइश करते हैं।

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हर दम रहते हैं चौकस

सेंट्रल जेल में हवलदार अब्दुल ने बताया, जेल के पुरुष व महिला स्टाफ को 24 घंटे सजग रहना होता हे, इसके लिए रिहर्सल होती रहती हैं। सायरन बजते ही सभी जेल पहुंच जाते हैं। स्थिति सामान्य होने की जानकारी देकर रूटीन काम में जुट जाते हैं। अपराधियों से दिन-रात पाला पड़ता है तो उन्हें समझाते हैं, ऐसा कोई काम दोबारा न करो कि खुद के साथ परिवार को दुख सहना पड़े। अवॉर्ड के बारे में पूछने पर बताया, पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह ने रायपुर में उन्हें अवार्ड देकर सम्मानित किया था।

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15 अगस्त और 26 जनवरी को रहती है ज्यादा मांग

राष्ट्रीय पर्व या कुछ सामाजिक- धार्मिक आयोजन के दिनों में कुछ कार्यक्रम होने पर जेल में मुलाकातियों के अलावा जब जन सामान्य की भी इंट्री होती है तो वे स्वल्पाहार तो लेते ही हैं। इसके अलावा जेल के अधिकारियों व कर्मचारियों से आग्रह करते हैं कि उन्हें जेल की रोटी या उसका कोई टुकड़ा ही तोड़कर खाने दे दीजिए। अब्दुल ने सामान्य चर्चा में बताया कि जेल में सुधारात्मक कार्यक्रम चलाए जाते हैं। इसमें बंदी-कैदियों के लिए योगासन, भाषण, विशिष्ट व्यक्तियों का आगमन कभी कभार जेल में होता है। अतिथियों के सत्कार में अक्सर यह बातें आम हैं वे आग्रह करते है कि उन्हें किसी तरह जेल की रोटी तोड़नी है। पूछने पर वे कहते है कि इससे भाग्य का लिखा मिट जाता है।