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बस्तर संभाग में हर चौथे व्यक्ति में है इस बीमारी के बैक्टीरिया, पांच साल में 733 लोगों की जा चुकी है जान

व्यक्ति में टीबी का वायरस सुप्त अवस्था में होता है। जब शरीर कमजोर होता है यानी इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है तो यह बैक्टीरिया आगे चलकर सक्रिय हो जाता हैं।

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बस्तर संभाग में हर चौथे व्यक्ति में है इस बीमारी के बैक्टीरिया, पांच साल में 733 लोगों की जा चुकी है जान

बस्तर संभाग में हर चौथे व्यक्ति में है इस बीमारी के बैक्टीरिया, पांच साल में 733 लोगों की जा चुकी है जान

शेख तैय्यब ताहिर/जगदलपुर. नेशनल टीबी रिपोर्ट के मुताबिक हर चौथे व्यक्ति में टीबी के बैक्टीरिया मौजूद हैं। बावजूद इसके बस्तर के लोग इस बीमारी के लक्षण को नजर अंदाज करते रहे हैं। यही वजह है पिछले पांच साल में ७३३ से अधिक लोगों की जान टीबी से जा चुकी है। यह स्थिति तब है सरकारी योजनाओं में इसका इलाज मुफ्त में किया जा रहा है और प्रत्येक जिले की स्वास्थ्य विभाग की टीम टीबी पीडि़तों के लिए घर तक जाकर दवा उपलब्ध करा रही है। एेसे में लोगों की इस बीमारी से मौत के पीछे लोगों की टीबी के प्रति उदासीनता और लक्षणों को गंभीरता से न लेकर अपनी जांच नहीं कराना है, इसलिए जब तक वे अपनी जांच कराने पहुंचते है, जब तक स्थिति बेकाबू हो जाती है, और उनकी मौत हो जाती हैं। दरअसल व्यक्ति में टीबी का वायरस सुप्त अवस्था में होता है। जब शरीर कमजोर होता है यानी इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है तो यह बैक्टीरिया आगे चलकर सक्रिय हो जाता हैं और टीबी का रूप धारण कर लेते हैं।

जिला क्षय नियंत्रण अधिकारी डॉ. सीआर मैत्री बताते हैं कि लोगों की धारणा बन गई है कि टीबी का लक्षण सिर्फ दो हफ्ते से अधिक खांसने का है। जबकि यह केवल फेफड़े के टीबी का लक्षण हैं। जबकि टीबी शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकती है। इसके अन्य लक्षण में खांसी में खून आना, भूख कम लगना, वजन कम होना, बुखार आना, शाम को बुखार बढ़ जाना, पसीना आना, छोटे बच्चे की विकास रुक जाना, बच्चे का चिड़चिड़ा हो जाना। हड्डी की टीबी है तो उस हड्डी में या उसके पास दर्द होगा। गिल्टी की टीबी है तो वहां ग्लैंड बढ़ जाती है।

बीमारी की जांच कराने की जगह लोग यह मान बैठे हैं कि उन्हें यह बीमारी हो ही नहीं सकती।

ठीक हो जाएगी।

हां मुझे मालूम है कि दो हफ्ते से अधिक खांसी होने पर टीबी की बीमारी हो सकती है। लेकिन जांच कराने कौन जाएगा। गांव में जो बीमारी की किसी को नहीं वह मुझे कैसे हो सकती है। अभी मेडिकल से दवा लेकर खाएंगे। इसके बाद आगे सोंचेंगे।

खांसी होती है तो मेडिकल से लेंगे। पहले दवा चलेगी, इससे ठीक हो जाता है टीबी जैसी बड़ी बीमारी के लिए जांच कराने की क्या जरूरत। टीबी पॉजिटिव निकल भी गया तो पूरा परिवार परेशान हो जाएगा। जांच कराएंगे। इलाज तो है, बाद में ठीक हो ही जाएगा।

टीबी मुक्त करने का लक्ष्य 2023
आज भी देश में सबसे ज्यादा मौतें जिस बीमारी से होतीं है उनमें टीबी का नाम सबसे आगे आता है। यही वजह है कि देश के पीएम मोदी ने इसे जड़ से खत्म करने के लिए मिशन मोड पर काम करने की जरूरत बताते हुए २०२५ का लक्ष्य रखा है। वहीं प्रदेश के सीएम भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ से इसे खत्म करने के लिए २०२३ का लक्ष्य रखा है। लेकिन लक्ष्य हासिल करने के लिए लापरवाही लोग न करें इस क्षेत्र में ध्यान देना जरूरी है।