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बस्तर में मिले 70 हजार वर्ष पुरानी मानव सभ्यता के प्रमाण, कार्बन डेटिँग से निर्धारित होगा कालखंड

Jagdalpur News: बस्तर के कई जगहों से हमने पाषाण के नमूनों का संग्रह किया है। इनके अध्ययन व केटेगरी बनाने पर पता चला है कि यहां तीस से 70 हजार पहले एक मानव सभ्यता विकसित हुई है। कार्बन डेटिंग व अधिक शोध करने पर और चौंकाने वाले तथ्य पता चलेंगे।

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Chhattisgarh News: बस्तर के प्रागैतिहासिक काल के अब तक ज्ञात इतिहास में अब एक नया अध्याय जुड़ने वाला है। इस नए अध्याय के जुड़ जाने के बाद बेहद चौंकाने वाले नतीजे सामने आने वाले हैँ। इसमें यह पता चला है कि बस्तर में अब से 70 हजार साल पहले से मानव की एक सभ्यता विकसित हुई थी। यह जानकारी क्षेत्रीय कार्यालय मानव विज्ञान सर्वेक्षण व शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय के एंथ्रापॉलाजी विभाग ने पांच साल की अथक मेहनत से जुटाए हैं। इनमें पाषाणकालीन औजार, हथियार व उपयोग में लाए जाने वाले उपकरण शामिल हैं। जानकारों ने बताया कि इस खोज से यह साबित हो गया है कि बस्तर के अबूझ इलाकों में तीस से 70 हजार साल पहले एक मानव सभ्यता अस्तित्व में थी।

पांच साल तक शोधार्थियों ने अबूझमाड़, बीजापुर, सुकमा, बारसूर व दंतेवाड़ा से गुजरने वाली प्रमुख नदियों के आसपास खोज अभियान को फोकस किया था। शुरुआत अबूझमाड़ से हुई। यहां पाषाणकालीन उपकरण के मिलते ही इन्होंने उसके सामंजस्य व अन्य विवरण जुटाने पूरे बस्तर का दौरा किया। दो दर्जन से अधिक जगह पर एक जैसे उपकरण, औजार व हथियार मिले। यह सभी हस्तचलित थे व इनका बहुतायत से उपयोग इस सभ्यता ने किया था।

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कार्बन डेटिँग से निर्धारित होगा कालखंड

शोधार्थियों ने चिन्हित जगहों से कई उपयोगी पत्थरों को निकाला। मानक स्तर पर इन्हें परखा फिर इनकी केटेगरी निर्धारित की गई है। मानव सर्वेक्षण विभाग अब इन उपकरण को कार्बन डेटिंग करने विभिन्न लैब भेजनें वाला है। जिससे इनके कालखंड का सटीक अनुमान लगेगा।

शैलचित्र व हाथ से चलाने वाले हथियार मिले

इस टीम में शामिल विवि में एंथ्रोपालाजी की सहायक प्राध्यापक डा सुकृता तिर्की ने बताया कि प्रमुख जलस्त्रोत से हमने चाकू, छीलन, छेद करने वाले औजार, तीर की नोंक, ग्राइंडिंग वाले पत्थर प्राप्त हुए हैं। इसके अलावा केशकाल के पास की पहाड़ी में शैल चित्र मिले हैं। इनमें सामूहिक शिकार, परिवार व हथेली के चिन्ह साफ नजर आ रहे हैं।

मानव उत्पत्ति के प्रमाण मिले

बस्तर के कई जगहों से हमने पाषाण के नमूनों का संग्रह किया है। इनके अध्ययन व केटेगरी बनाने पर पता चला है कि यहां तीस से 70 हजार पहले एक मानव सभ्यता विकसित हुई है। कार्बन डेटिंग व अधिक शोध करने पर और चौंकाने वाले तथ्य पता चलेंगे। इससे यहां के इतिहास का नया अध्याय खुलेगा। - डा पीयुष रंजन साहू, कार्यालय प्रमुख, मानव विज्ञान सर्वेक्षण

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