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आईईडी तलाशने फोर्स लगा रही आग

बीते तीन साल में बीजापुर में 4436 आगजनी की घटनाएं, रोड ओपनिंग और एरिया डॉमिनेशन के लिए कैंप से निकलती है फोर्स, विजिबिलिटी बढ़ाने के लिए आग लगा देते हैं

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आगजनी की 8887 वारदात वन अमले ने रिकॉर्ड की है

अजय श्रीवास्तव।बस्तर वन वृत्त में 2019 से अप्रैल 2022 तक जंगल में आगजनी की 8887 वारदात वन अमले ने रिकॉर्ड की है। इनमे से सर्वाधिक 4436 घटनाएं अकेले बीजापुर में हुई है। आग लगने की घटनाओं के पीछे महुआ बीनने, तेंदूपत्ता तलाशने, झूम खेती पहले प्रमुख वजह रही हैं। पर हाल ही में एक नई वजह सामने आई है, वह है जंगल में तैनात फोर्स।

फोर्स अपने स्थापित कैंप के आसपास विजिबिलिटी बढ़ाने के लिए छोटे बड़े झाड़ियों को आग लगा दे रही है। इसके अलावा रोड ओपनिंग करते समय आईईडी विस्फोट से बचने भी कई जगह वे आग लगा देते है ताकि विस्फोटक के तार और टाइमर जल जाएं। यह जानकारी सुरक्षा बल के जवानों ने बताई है। उनका कहना है वनोपज बटोरने की आड में नक्सली उनकी रेकी करते हैं। इसे साबित करने के लिए यह भी बताया जा रहा है कि वनोपज बटोरने का काम फरवरी के दूसरे पखवाड़े के साथ ही मार्च तक ही चलता है। जबकि आग लगने की घटना साल भर होती रहती है।

सेटेलाइट इमेज से मिल रही जानकारी

जंगल में आग की खबर फॉरेस्ट अमले को सेटेलाइट से भेजे गए इमेज से मिलती है। हाल ही में मिली जानकारी में बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा और बस्तर वन मंडल में लगी आग को दर्शाया गया है। इसमें बीजापुर, सुकमा और दंतेवाड़ा में आग लगने की 8576 घटनाएं इन्हीं तीन वन मंडल में तीन साल के भीतर रिकॉर्ड हुई हैं। इन तीनों जिलों में सुरक्षा बालों की 30 से अधिक बटालियन की तैनाती है। यह फोर्स नक्सल मूवमेंट को काबू में रखने इन इलाकों के जंगल में कैंप बनाकर रह रही है। 2019 से 2022 तक बस्तर िडवीजन में 788, बीजापुर में 4436, दंतेवाड़ा में 2891 और सुकमा में 752 जगह आगजनी की घटनाएं रेकार्ड की गई हैं।

आईईडी से बचने सतर्कता
जंगल में तैनात इन फोर्स का काम नक्सलियों की मूवमेंट को काबू में करने के साथ ही अंदरुनी इलाकों में बनने वाली सड़कों, पुल पुलिया, शासकीय भवन व अन्य निर्माण व माइनिंग को सुरक्षा देने का है। इसके अलावा आम आदमी व वीआईपी की आवाजाही के दौरान रोड ओपनिंग व एरिया डॉमिनेशन भी है। नक्सली अक्सर फोर्स को निशाना साधने आईईडी ( इंप्रूवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस ) और वूबी ट्रैप ( नुकीले सरिए ) छिपा कर रख देते हैं। इन्हे दूर से देखने और नीचे बिछे कॉर्टेक्स वायार को नष्ट करने फोर्स कई जगह आग लगा देती है।

यह कहना है पुलिस व वन अधिकारियों का

सीसीएफ मो शाहीद का कहना है िक जंगल में आग लगने की घटना को लेकर विशेष सतर्कता बरती जाती है। आग पर तत्काल काबू पाने अमले व वन सुरक्षा समिति जुट जाते है। अभी तक आग से बड़े पेड़ों को नुक़सान होने की जानकारी नहीं है। वनोपज बटोरने के लिए भी आग लगाने की शिकायतें आती रहती हैं। इसी तर्ज में आईजी पी सुंदराज का कहरा है िक पहले ऐसी घटनाएं होती थीं। अब ऐसा न के बराबर हो रहा है। कही पेड़ों को हटाया भी जाता है तो फोर्स प्लांटेशन कर देती है।