CG News: ठंड का मौसम आ गया है और ऐसे में दिल के बीमार मरीजों के लिए परेशानी बढ़ने वाली है।
जगदलपुर। CG News: ठंड का मौसम आ गया है और ऐसे में दिल के बीमार मरीजों के लिए परेशानी बढ़ने वाली है। इसके लिए बदली जीवनशैली एवं अनियमित दिनचर्या से स्ट्रोक की समस्या और बढ़ती है।
एक्सपर्ट की माने तो दिल की बीमारी वाले 15 प्रतिशत मरीजों को स्ट्रोक की समस्या होती है। पहले यह समस्या बढ़ती उम्र में होती थी, लेकिन अब स्ट्रोक का खतरा युवाओं को होने लगा है। युवाओं के लिए ये अधिक घातक होता है क्योंकि यह उन्हें जीवन भरके लिए विकलांग बना सकता है। सर्दियों के मौसम में स्ट्रोक का खतरा 14-15 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। इसलिये सर्द मौसम में सेहत का ख्याल रखना जरूरी है।
स्ट्रोक के लक्षण
एक तरफ के हाथ-पैर कमजोर होते हैं तो यह स्ट्रोक का प्रारंभिक लक्षण हो सकता है। चेहरा शिथिल पडऩा, बांहों में कमजोरी होना और बोलने में कठिनाई होना स्ट्रोक के सबसे सामान्य रूप से दिखाई देने वाले लक्षण या संकेत होते हैं। इनके अलावा और भी कई संकेत होते हैं, जैसे- शरीर का कोई भी हिस्सा सुन्न पड़ जाना, चक्कर आना, संतुलन खोना या बिना किसी स्पष्ट कारण के जमीन पर गिरना, एक या दोनों आँखों से दिखाई न देना, अचानक धुंधला या कम दिखाई देना। सामान्य रूप से गंभीर और अचानक सिरदर्द होना, निगलने में कठिनाई होना, स्ट्रोक से पीड़ित व्यक्ति को चलने-फिरने में दिक्कत होना।
स्ट्रोक से बचाव
स्ट्रोक से बचाव के लिए व्यायाम, उचित खानपान और नशे से दूर रहने की सबसे ज्यादा जरूरत है। तनाव से बचने की कोशिश करनी चाहिए। स्ट्रोक उच्च रक्तचाप के कारण भी होता है। इसलिए बढ़ते रक्तचाप का ध्यान रखना महत्वपूर्ण होता है।
इसलिए बनाया जाता है विश्व स्ट्रोक दिवस
अचानक से होने वाली मस्तिष्क स्ट्रोक के प्रति वैश्विक स्तर पर जागरूकता फैलाने के लिए प्रति वर्ष 29 अक्टूबर को विश्व स्ट्रोक दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष विश्व स्ट्रोक दिवस ’’सेव प्रिसियस टाइम’’( कीमती समय बचाएं) की थीम पर मनाया जाएगा। इस दौरान जिले के शासकीय स्वास्थ्य केंद्रों में स्वास्थ्य कर्मी बैंगनी रिबन पहनेंगे और उनके द्वारा लोगों को स्ट्रोक के कारणों के बारे में जानकारी दी जाएगी।
स्ट्रोक एक ऐसी समस्या है जो मस्तिष्क के भीतर धमनियों को प्रभावित करता है। स्ट्रोक तब होता है जब मस्तिष्क में ऑक्सीजन और पोषक तत्वों को ले जाने वाली रक्त वाहिका या तो किसी थक्कों द्वारा अवरुद्ध हो जाती है या फट जाती है। इस वजह से स्ट्रोक से ग्रसित व्यक्ति की बोलने, देखने और शारीरिक प्रकिया भी प्रभावित होती है। स्ट्रोक किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है। स्ट्रोक की समस्या में अगर समय पर उपचार मिल जाये तो काफी संभावना रहती है कि व्यक्ति पूरी तरह से स्वस्थ हो जाए। उपचार में देरी से शारीरिक व मानसिक सेहत खराब हो सकती है।
डॉ.आर.के.चतुर्वेदी, सीएमएचओ