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जानिए कैसे बनाई जाती है तुपकी, तुपकी की गोली यानी पेंग के औषधिय गुण जानकर हैरान रह जाएगें आप

तुपकी में प्रयुक्त किए जाने वाले गोली जिसे स्थानीय बोली में ‘पेंग’ अथवा ‘पेंगु’ कहा जाता है जो एक जंगली लता का फल है। इसका (Name In hindi) हिन्दी नाम ‘मालकांगिनी’ है

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जानिए कैसे बनाई जाती है तुपकी, तुपकी की गोली यानी पेंग के औषधिय गुण जानकर हैरान रह जाएगें आप

जगदलपुर में ‘गोंचा पर्व’ में तुपकी चलाने की एक अलग ही परंपरा दृष्टिगोचर होती है, जो कि गोंचा का मुख्य आकर्षण है। तुपकी चलाने की परंपरा, बस्तर को छोडक़र पूरे भारत में अन्यत्र कहीं भी नही होती। दीवाली के पटाके की तरह तुपकी की गोलियों से सारा शहर गंज उठता है। यह बंदूक रूपी तुपकी पोले बांस की नली से बनायी जाती है, जिसे ग्रामीण अंचल के आदिवासी तैयार करते हैं।

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तुपकियों का निर्माण अपनी कल्पना शक्ति के आधार पर
इस तुपकी को तैयार करने के लिए, ग्रामीण गोंचा पर्व के पहले ही जुट जाते हैं तथा तरह-तरह की तुपकियों का निर्माण अपनी कल्पना शक्ति के आधार पर करते हैं। इन तुपकियों में आधुनिकता भी समाहित होती है। ताड़ के पत्तों, बांस की खपच्ची, छिंद के पत्ते, कागज, रंग-बिरंगी पन्नियों के साथ तुपकियों में लकड़ी का इस्तेमाल करते हुए उसे बंदूक का रूप देते हैं। आदिवासी अपने साथ लायी तुपकियों में से एक अपने लिए रखकर शेष शहरी लोगों को बेच देते हैं, इससे उन्हें कुछ आर्थिक लाभ भी हो जाता है। इस अवसर पर आदिवासी महिलाएं तुपकी के लिए पेंग के गुच्छे बेचती नजर आती हैं।

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medicinal properties में पेंग का महत्व
तुपकी में प्रयुक्त किए जाने वाले गोली जिसे स्थानीय बोली में ‘पेंग’ अथवा ‘पेंगु’ कहा जाता है जो एक जंगली लता का फल है। इसका हिन्दी नाम ‘मालकांगिनी’ है जो आषाढ़ महीने में विभिन्न पेड़ों पर आश्रित बेलों पर फूलते-फलते हैं। गोंचा पर्व में इसके कच्चे और हरे फलों को तोडक़र तुपकी चलाने के उद्धेश्य से इसे बाजारों में, शहर की गलियों में ग्रामीणों के द्वारा तुपकी के साथ विक्रय किया जाता है तथा शेष दिनों में इसके पके हुए बीज को बाजारों में बेच दिया जाता है जिससे इसके बीज से तेल निकाला जाता है, जो शरीर के जोड़ों का दर्द, गठिया तथा वात रोगों के लिए अचूक दवा है। इसके तेल से शरीर की मालिश की जाती है।

निए औषधिय गुणों से भरपूर जंगली चीजों के बारें में

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