
इन अफसरों ने मिलकर अपने चहेतों को करोड़ों का मुनाफा दिलाने ट्रेन का रूट ही बदल दिया, शहर के ये रसूखदार भी हैं शामिल
जगदलपुर. रावघाट रेलवे लाइन (Rowghat railway Line) और प्रस्तावित स्टेशन के भूमि में २५० करोड़ मुआवजा की राशि घोटाला में आइएएस, एसडीएम, भू-स्वामी सहित ११ आरोपियों के विरूद्ध कोतवाली पुलिस ने सोमवार को एफआईआर दर्ज किया है। इसके साथ ही सभी आरोपियों के ऊपर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है। कोतवाली थाना प्रभारी धनंजय सिन्हा ने बताया ३० जुलाई को उक्त मामले जिला प्रशासन की तरफ उक्त मामले में २१ पेज का जांच प्रतिवेदन पुलिस को सौंपा गया था। जांच प्रतिवेदन का बारीकी से जांच और कानूनी सलाह के बाद पुलिस ने ९ पेज का शॉर्ट रिपोर्ट तैयार किया। जमीन मुआवजा संबंधित सभी दस्तावेजों में नियम विरूद्ध और कूटरचना करना पाया गया। मामले में उच्च अधिकारियों से सभी बिंदुओं पर बारीकी से जांच उपरांत पाया गया कि प्रशासनिक अधिकारी (IAS Officer) , भूस्वामी व इरकॉन कंपनी के अधिकारियों की मिली भगत से मुआवजा राशि में घोटाला किया गया है। पुलिस ने बड़े मामले में महज ४ दिन में जांच पूरी आरोपियों पर अपराध पंजीबद्ध किया है।
10 मामलों में दर्ज हुआ एफआईआर
कोतवाली पुलिस ने मामले में सभी ११ आरोपियों के विरूद्ध धारा 109,120 बी, 420, 470, 768, 471, 406, 407, 408 और 409 के तहत एफआईआर दर्ज किया गया है।
चार गुना अधिक कीमतों में जमीन किया अधिकृत
भूमि स्वामी के साथ मिलकर अधिकारियों ने उक्त जमीन को निगम क्षेत्र बताकर 4 गुना कीमतों में जमीन को अधिकृत किया गया था। इस घोटाले में कई विभागीय अधिकारियों का भी हाथ होना सामने आया है। इसके अलावा बिना पहुंच वाले भू स्वामियों के जमीनों को सस्ते दरों में ले लिया गया। प्रस्तावित रेल लाइन और हाल्टिंग स्टेशन के आसपास शहर के बड़े-बड़े नेताओं और व्यापारियों की जमीन है, जिसे परियोजना में शामिल कर इस महाघोटाले को अंजाम दिया गया।
इन 11 के खिलाफ हुआ एफआईआर
एफ आईआर में तत्कालीन पूर्व अपर कलक्टर हीरालाल नायक (आईएएस), तत्कालीन एसडीएम सियाराम कुर्रे, तहसीलदार दीनदयाल मण्डावी, राजस्व निरीक्षक अर्जुन श्रीवास्तव, प्रभारी उप पंजीयक लिपिक कौशल ठाकुर, पटवारी धर्मनारायण साहु, इरकॉन कंपनी के अधिकारी सुरेश बी मिताली, एआर मूर्ति, वन परिक्षेत्र अधिकारी जीआर राव, भूस्वामी बली नागवंशी व नीलिमा टीव्ही रवि के विरूद्ध पुलिस ने एफआईआर दर्ज किया है।
डायवर्टेड भूमि को परियोजना में किया था शामिल
रेल मार्ग के भूमि घोटाले को लेकर लंबे समय से सवाल उठ रहे थे। 250 करोड़ का यह घोटाला अधिकारियों और स्वामियों ने मिलकर किया था। इसके बावजूद भी और राशि निकालने की योजना बनाई जा रही थी। जिसमें गिने-चुने भू-स्वामियों की ही जमीनी ली गई। जबकि प्रस्तावित रेलवे स्टेशन के पास ही कई एकड़ सरकारी भूमि है। जिसे छोड़ कर डायवर्टेड भूमि को परियोजना में शामिल किया गया था।
अधिसूचना के बाद भी भूमि का नामांतरण
जगदलपुर-रावघाट रेल मार्ग के लिए २१ दिसंबर २०१७ को रेलवे बोर्ड ने राजपत्र में अधिसूचना जारी कर किया था। जिसके बाद प्रभावित क्षेत्र में भूमि के क्रय-विक्रय, नामांतरण व बंटवारे में प्रतिबंध लगा दिया गया था। बावजूद राजस्व विभाग के अफसरों की मिली भगत से आधा दर्जन से अधिक प्रभावितों ने नियम विरूद्ध नामांतरण और बंटवारा किया। इनमें से कुछ मामले कंगोली, अघनपुर तथा पल्ली हंैं। इनके अलावा एक चक की निजी पड़त भूमि को कई भागों में बांटा गया। ग्राम पल्ली के खसरा नंबर १२५ रकबा १.०४ हेक्टेयर को २५ से अधिक भागों में बांटा गया है। इसी तरह इस गांव के खसरा नंबर १२३ को भी ३ खातों में बांटा गया है।
दो रसूखदारों ने अपनी जमीन पर रेलवे स्टेशन बनाने बनाई योजना
जगदलपुर-रावघाट विशेष रेल परियोजना के लिए हुए भू-अधिग्रहण का खेल में दो रसूखदारों ने निजी भूमि का उपयोग करने ग्राम पल्ली में नया रेलवे स्टेशन की योजना बनाई। इसके लिए न्यायालय का भी सहारा लिया। अफसरों और भू-माफिया ने मिलकर ग्राम अघनपुर में प्रस्तावित रेल मार्ग के मध्य श्मशान बताकर कोर्ट में पीआईएल दायर करवाया और गांव पल्ली में रेल अफसरों से मिलकर रेल लाइन का एलायमेंट बदलकर रसूखदारों की जमी में स्टेशन बनाने का प्रस्ताव को मंजूरी दिलवाया।
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Published on:
06 Aug 2019 12:11 pm
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