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महाबलीपुरम की मूर्तियां स्थापित, काकीनाडा के 40 शिल्पकार नक्काशी में जुटे… गंगामुंडा तट पर आकार ले रहा सबसे बड़ा आध्यात्मिक धाम

Jagdalpur News: जगदलपुर में गंगामुंडा तालाब के शांत किनारे पर एक भव्य आध्यात्मिक धाम आकार ले रहा है। यहां श्री गंगा कैलाशनाथ चतुर्भुज शिवालय का निर्माण तेजी से जारी है, जो पूर्ण होने के बाद बस्तर अंचल का सबसे बड़ा अध्यात्मिक केंद्र बनने की दिशा में अग्रसर है।

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गंगामुंडा तट पर भव्य शिवालय निर्माण तेज (फोटो सोर्स- पत्रिका)

गंगामुंडा तट पर भव्य शिवालय निर्माण तेज (फोटो सोर्स- पत्रिका)

CG News: जगदलपुर में गंगामुंडा तालाब के शांत किनारे पर एक भव्य आध्यात्मिक धाम आकार ले रहा है। यहां श्री गंगा कैलाशनाथ चतुर्भुज शिवालय का निर्माण तेजी से जारी है, जो पूर्ण होने के बाद बस्तर अंचल का सबसे बड़ा अध्यात्मिक केंद्र बनने की दिशा में अग्रसर है। द्रविड़ शैली में बन रहा यह मंदिर श्रद्धा, वास्तुकला और सांस्कृतिक वैभव का अद्वितीय संगम होगा। शिवालय का निर्माण स्वर्गीय मरिपि सत्यनारायण नायडू के परिवार द्वारा दान की गई भूमि पर किया जा रहा है, जबकि श्री गंगा कैलाशनाथ चतुर्भुज शिवालय ट्रस्ट इसकी संपूर्ण देखरेख कर रहा है।

ट्रस्ट ने वर्ष 2027 की महाशिवरात्रि पर प्राण प्रतिष्ठा का लक्ष्य निर्धारित किया है। मंदिर परिसर लगभग 30 हजार वर्गफुट क्षेत्र में विकसित किया जा रहा है, जहां धार्मिक अनुष्ठानों के साथ ध्यान, योग और आध्यात्मिक गतिविधियों का भी केंद्र तैयार होगा। आंध्र समाज के अध्यक्ष एम. जयंत नायडू के निर्देशन में चल रहे इस निर्माण कार्य में पारंपरिक दक्षिण भारतीय स्थापत्य की झलक दिखाई दे रही है।

ट्रस्ट का कहना है कि यह शिवालय केवल पूजा का स्थल नहीं, बल्कि सनातन परंपरा, साधना और सांस्कृतिक एकात्म का केंद्र बनेगा, जहां श्रद्धालुओं को एक ही परिसर में आध्यात्मिक अनुभूति का अवसर मिलेगा।

मंदिर की विशेषताएं एक नजर में

  • मंदिर का नक्शा तिरुपति के प्रसिद्ध वास्तु विशेषज्ञ बाल भास्कर ने तैयार किया, जो अब तक 216 मंदिरों की डिजाइन बना चुके।
  • प्रथम तल के गर्भगृह में स्थापित होगा चतुरमुखी शिवङ्क्षलग यह मंदिर की प्रमुख विशेषता।
  • भूतल पर नवग्रह मंदिर, बजरंगबली मंदिर, यज्ञशाला और ध्यान केंद्र का निर्माण।
  • प्रथम तल पर दुर्गा, सरस्वती, अन्नपूर्णा, गणेश, कार्तिकेय, रामदरबार और सूर्य देव के सात मंदिर।
  • मुख्य द्वार पर हनुमान जी, प्रवेश द्वार पर मां दंतेश्वरी की प्रतिमा स्थापित होगी।
  • सभी मूर्तियां महाबलीपुरम से लाई जा चुकी हैं।
  • आंध्रप्रदेश के काकीनाडा से आए लगभग 40 शिल्पकार नक्काशी के काम में जुटे।