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जानिए कैसे जवानों ने 6 बार नक्सलियों का सामना करते हुए दिया इतने बड़े ऑपरेशन को अंजाम

Naxal Opration : पहली बार अूबझमाड़ में 60 किमी अंदर घुसकर 300 जवान पहुंचे थे धुरबेड़ा, लौट रहे जवानों पर 6 जगह माओवादियों ने की फायरिंग।

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जानिए कैसे जवानों ने 6 बार नक्सलियों का सामना करते हुए दिया इतने बड़े ऑपरेशन को अंजाम

जानिए कैसे जवानों ने 6 बार नक्सलियों का सामना करते हुए दिया इतने बड़े ऑपरेशन को अंजाम

शेख तैय्यब ताहिर/जगदलपुर. अबूझमाड़ में पहली बार बस्तर पुलिस के 300 जवान 60 किमी अंदर घुसकर धुरबेड़ा पहुंचे और ऑपरेशन (Naxal Opration) में बड़ी सफलता हासिल की। लेकिन सफलता हासिल करने के बाद जवानों की टीम को वापसी के दौरान काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पुलिस के मुताबिक ऑपरेशन के बाद माओवदियों के शव और दो घायल जवान को लेकर आ रही टीम पर माओवादियों ने रास्तें में 6 जगह हमला किया है। हालांकि जवानों की मुस्तैदी के चलते इन हमलों में जवानों को कोई नुकसान नहीं हुआ लेकिन उन्हें वापस अपने आकाबेड़ा कैंप लौटने में काफी देर हो गई।

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बार बार हमले की वजह से हुई देर
मुठभेड़ के दौरान भारी मात्रा में विस्फोटक और माओवादी सामाग्री के साथ एक कार्बाइन और भरमार हथियार भी बरामद किए गए हैं। वैसे तो मुठभेड़ के बाद जवानों को नजदीकी कैंप 2.30 बजे तक पहुंच जाना था। लेकिन माओवादियों के बार बार हमले की वजह से वे देर रात तक कैंप नहीं पहुंच सके। पुलिस के मुताबिक घटना के बाद जवानों की वापसी के दौरान जगह जगह माओवादी हमला कर रहे हैं। इसे देखते हुए ही पास के गुमरका और एक अन्य कैंप से दो कंपनियां भेजी गई।

एक ओर गुमरका तो दूसरी ओर महाराष्ट्र का हातबेड़ा कैंप है
जिस जगह मुठभेड़ हुई वहां से एक ओर गुमरका तो दूसरी ओर महाराष्ट्र का हातेबेड़ा कैंम्प है। वहीं तीसरी ओर ओरछा व धनोरा कैंम्प है। लेकिन सभी काफी दूर हैं। दूरी ज्यादा होने के कारण जवानों को पहुचने में देरी हो रही है क्योंकि गुमरका में मुठभेड़ के बाद रास्ते में लगभग ४ बार और माओवादियों से जवानों का सामना हो चुका है।

एक बार फिर माओवादियों को चौकाया
ऑपरेशन मॉनसून में एक बार फिर माओवादियों को चौकाया है। दरअसल मॉनसून में आम तौर पर सर्चिंग की गति धीमी हो जाती है, लेकिन पिछले साल से पुलिस ने अपनी रणनीति बदली और अब डिफेंसिव रहने की जगह अटैकिंग मोड पर माओवादियों के कोर इलाके में जाकर ऑपरेशन चलाया जा रहा है। इस ऑपरेशन की भी यही खासियत रही। माओवादियों की राजधानी कहे जाने वाले अबूझमाड़ में न केवल जवान घुसे बल्कि इसके भी कोर इलाके में जाकर ऑपरेशन को अंजाम दिया। नतीजतन इलाके को सुरक्षित मानकर बैठे माओवादियों सकते में आ गए और जवानों के हाथ बड़ी सफलता हाथ लग गई।

जोन तक पहुंचने तीन दिन लगे जवानों को
दरअसल बड़ी संख्या में माआेवादियों के होन की सूचना जवानों को मिलने के बाद ऑपरेशन लांच किया गया। जवान मंगलवार को आकाबेड़ा पुलिस कैंप से निकले थे। इसके बाद लगातार तीन दिन चलने और तीन रात जंगल में बिताने के बाद वे प्लान हिटिंग जोन में शनिवार की सुबह पहुंचे। इसके बाद सुबह तडक़े साढ़े ५ बजे माओवादियों पर हमला किया।

400 माओवादियों के साथ सीसी मेंबर की भी सूचना
पुलिस को पक्की सूचना मिली थी कि गुमरका के जंगलों में 400 की संख्या में माआेवादी मौजूद थे। इसके साथ ही यहां सीसी मेंबर के होने की जानकारी थी। इसे देखते हुए ऑपरेशन लांच किया गया। इसके लिए लंबी तैयारी की गई थी।

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