
टिड्डी दल दो दिन में कोरिया से नहीं बढ़ा आगे इसलिए टला खतरा, शहडोल की ओर किया रुख, जानिए कैसे
जगदलपुर। महाराष्ट्र के रास्ते छत्तीसगढ़ के भरत कोरिया में दाखिल हुए टिड्डी दल दो दिन बाद भी उसी इलाके में बना रहा, उसने छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों की तरफ रुख नहीं किया। इसलिए फिलहाल बस्तर समेत प्रदेश के अन्य जिलों से टिड्डी का खतरा टल गया है। रांची के प्लांट क्वारेंटाइन सेंटर के वैज्ञानिकों ने इस पर कहा है कि फिलहाल दल ने शहडोल की ओर अपना रुख किया है। वहां उन्हें हरी फसल मिलेगी इसलिए उस दिशा में माइग्रेट हुए हैं।
टड्डियों का दल अब भी देश में बना हुआ है
कृषि विज्ञान केंद्र बस्तर के वैज्ञानिक धर्मपाल केरकेट्टा ने बताया कि दो दिन पहले जब दल को कोरिया में रिपोर्ट किया गया तब अलर्ट इसलिए जारी किया गया क्योंकि दल के आगे बढऩे की पूरी संभावना थी। दल एक दिन में १०० से डेढ़ सौ किमी तक की दूरी तय करता है। ऐसे में उसे प्रदेश के मैदानी जिलों में पहुंचने में २ दिन का वक्त ही लगता। फिलहाल टिड्डी दल शहडोल की ओर जा चुका है। इसलिए खतरा टल गया है। छत्तीसगढ़ में जो दल दाखिल हुआ था वह पांच से ६ लाख की संख्या वाला था। यह पूरे प्रदेश को ज्यादा प्रभावित नहीं कर सकता था, फिर भी एहतियात के तौर पर अलर्ट जारी किया गया। अलर्ट फिलहाल बरकरार है क्योंकि टिड्डियों का दल अब भी देश में बना हुआ है।
टिड्डियों की ब्रीडिंग छत्तीसगढ़ में संभव नहीं
कृषि विज्ञान केंद्र बस्तर के वैज्ञानिक धर्मपाल केरकेट्टा ने बताया कि छत्तीसगढ़ में दाखिल हुए टिड्डी दल के लिए यहां ब्रिडिंग की संभावना नहीं है। टिड्डियों का दल ज्यादातर रेगिस्तानी इलाके में ही ब्रिडिंग करता है। वहां उन्हें इसके लिए अनुकूल माहौल मिलता है। छत्तीसगढ़ में ऐसे हालात नहीं हैं। यहां सिंगल फैमिली में टिड्डी पाए जाते हैं लेकिन व्यापक रूप में वे यहां नहीं मिलते हैं।
Published on:
04 Jun 2020 03:10 pm
बड़ी खबरें
View Allजगदलपुर
छत्तीसगढ़
ट्रेंडिंग
