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बस्तर में 400 से अधिक मौत के गड्ढे, लापरवाही निगल रही लोगों की जिंदगी

जिले के कई इलाकों में मुरुम खदान हैं। यहां मुरुम निकालकर लोग चले गए और अपने पीछे छोड़ गए गड्ढे। इन गड्ढों में छुई निकालने लगते हैं तो कभी बारिश का पानी भरने से आसपास रहने वाले लोगों ने वहां निस्तारी शुरू कर देते हैं। अब हालत ये है कि कभी इसके धसकने से तो कभी इसमें डूबने से यहां मौत हो रही है।

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बस्तर में 400 से अधिक मौत के गड्ढे, लापरवाही निगल रही लोगों की जिंदगी

जिले के कई इलाकों में मुरुम खदान हैं। यहां मुरुम निकालकर लोग चले गए और अपने पीछे छोड़ गए गड्ढे। इन गड्ढों में छुई निकालने लगते हैं तो कभी बारिश का पानी भरने से आसपास रहने वाले लोगों ने वहां निस्तारी शुरू कर देते हैं। अब हालत ये है कि कभी इसके धसकने से तो कभी इसमें डूबने से यहां मौत हो रही है। मालगांव की घटना के बाद पत्रिका ने जिले के सिर्फ नगरनार इलाके का ही दौरा कर जानने की कोशिश की कितनी जानलेवा खदाने हैं।

शनिवार को मालगांव, उपनपाल, नगरनार जैसे चार से पांच पंचायतों का ही दौरा किया था कि यहां करीब 100 से अधिक गड्ढे ऐसे मिले जहां से मुरुम निकाला गया है लेकिन इसके बाद इसका निपटान नहीं किया गया। खदानों के कई गड्ढों में पूरे साल पानी भरा रहता है। अब वहां बारिश का पानी भरा है। जहां कभी भी कोई भी घटना घटित हो सकती है। कई जगह तो एक ही स्थान पर 20 से अधिक जानलेवा गड्ढें हैं। जानकार बताते हैं कि जिले में कोई भी इलाका ऐसा नहीं है जहां मुरुम के लिए गांव में खुदाई की गई हो। हर एक पंचायत में कम से कम एक इलाका है जहां इस तरह की स्थिति है। कई पंचायत में इस तरह के 10-10 गड्ढें है।

जिम्मेदारी तय होनी चाहिए, उचित कार्रवाई भी जरूरी
अवैध मुरुम खदान एक आपराधिक कृत्य है। अधिवक्ता संकल्प दुबे के मुताबिक ऐसे मामलों में जांच कर जिला प्रशासन को जांच कर कार्रवाई करनी चाहिए। वहीं इस तरह के अवैध खदानों के लिए तो प्रशासनिक अधिकारी भी जिम्मेदार होते हैं। इसलिए प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। खनिज अधिनियम में सारी नियमावली है इसके आधार पर ही कार्रवाई होनी चाहिए। जिनके परिवार के सदस्यों की मौत हुई है। उनको मुआवजा दिया जाना ही कोई निराकरण नहीं है इस तरह घटना के लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।

एक साल में ही करीब 10 लोगों की मौत
खदानों के गड्ढों में डूबने या धसकने पर दबने के कारण एक साल में करीब 10 लोगों की जान जा चुकी है। इसी साल जिले में मार्केल में एक स्कूली बच्चे की मुरुम खदान के पानी में डूबने से मौत हो गई थी। इसी तरह मारडूम और दो अलग-अलग इलाकों में डूबने से बच्चों एक अधेड़ तो दो और बच्चों की मौत हो गई थी। वहीं इसके बाद शुक्रवार को मालगांव में मुरूम खदान में छुई निकालने के दौरान खदान धसकने से मौत हो गई थी। पिछले पांच साल की तरफ नजर डालें तो करीब 33 लोगों की मौत के आंकड़े सामने आए हैं।