
वॉकी-टॉकी से मिली 40 लाख इनामी नक्सली रमन्ना के मौत की खबर, अंतिम यात्रा में बेटा भी हुआ था शामिल
जगदलपुर. माओवादियों की दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी(डीकेएसजेडसी) के सचिव राउला श्रीनिवास उर्फ रमन्ना की हार्डअटैक से मौत होने की खबर है। हालांकि इसकी पुष्टि न तो माओवादियों की तरफ से और न हीं पुलिस की तरफ से की गई है। लेकिन पुलिस सूत्रों की माने तो खुफिया विंग ने हाल ही के दिनों में माओवादियों के वॉकी-टॉकी को ट्रेस किया था। जिसमें लगातार तीन दिन तक ट्रेस किया गया जिसमें माओवादी संगठन अपनी जोनल कमेटी के लोगों को एकत्र होने का मैसेज आता रहा।
माओवादी पिता की अंतिम यात्रा में बेटा भी शामिल
इसमें कई जानकारियां भी पुलिस को हाथ लगी है जिसमें रमन्ना की हार्टअटैक की जानकारी भी शामिल होने की खबर है। इस मामले में जब तेलंगाना के कोत्तागुड़म के एसपी सुनील दत्ता से बात की गई तो उन्होंने भी कहा कि रमन्ना के मारे जाने की सूचना तो आई है लेकिन इसके कोई पुख्ता आधार नहीं है। उनके पास न तो बॉडी है और न ही माओवादियों ने इसकी पुष्टि की है। अंतिम यात्रा में बेटा भी हुआ शामिल, बीजापुर-सुकमा की सीमा पर दफनाने की खबरतेलंगाना के सिद्धिपेट के रहने वाले रमन्ना की मौत की खबर को लेकर मिली जानकारी के मुताबिक उसका बेटा कट्टम रमेश को भी माओवादी संगठन ने बुलाया था।
19 साल की उम्र से था सक्रिय
रमन्ना की बॉडी को बीजापुर-सुकमा के सीमावर्ती इलाके पालागुड़ा के जंगलों में दफनाया गया। जहां उसका बेटा भी मौजूद रहा। गौरतलब है कि कट्टम रमेश दक्षिण बस्तर के आश्रम में पढ़ाई कर रहा था। पहचान जाहिर होने के डर से कट्टम रमेश पढ़ाई छोडक़र तेलंगाना चला गया और माओवादी संगठन से जुड़ गया। बताया जा रहा है कि वह इस वक्त आंध्र-ओडिशा इलाके(एओबी) में सक्रिय है। १९ साल से सक्रिय था संगठन में, डेढ़ करोड़ से अधिक का था ईनाम माओवादी संगठन में रमन्ना १९ साल की उम्र से सक्रिय तौर पर जुड़ा। एरिया कमेटी से जुड़े रमन्ना ने अपनी काबिलियत के दम पर पहले डिविजलन कमेटी में सदस्य और फिर इसके सचिव पद की जिम्मेदारी संभाली। कुछ समय तक आंध्र-ओडिशा स्पेशल जोनल कमेटी का पद संभालने के बाद उसे दो साल पहले ही दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी की कमान मिली थी। कोंटा, जगरगुंडा, गोलापल्ली में लंबे समय तक काम करने की वजह से उसे काफी लोग पहचानते थे। उस पर कई अपराध भी छत्तीसगढ़ पुलिस ने दर्ज कर रखे थे।
रमन्ना के नाम पर गांव का नाम भी रख दिया
इसलिए रमन्ना की मौत माओवादी संगठन के लिए बड़े झटके के रूप में देख रही है। रमन्ना पर डेढ़ करोड़ से अधिक का इनाम सरकार ने घोषित कर रखा था।रमन्ना के नाम पर गांव का नाम भी रखा गया हैरमन्ना की शादी गोरखा गांव के सावित्रि से हुई थी। शादी के बाद जब रमन्ना को बड़ी जिम्मेदारी मिली तो बताया जाता है कि गोरखा गांव के लोगों ने रमन्ना के नाम पर रामनगर रख दिया था। हालांकि रमन्ना की मौत की खबर के बाद आज भी यहां कोई खास हलचल नहीं दिखी है।
रमन्ना की मौत के बाद संगठन टूटने की संभावना
वहीं रमन्ना की पत्नी सावित्रि माओवादियों की डीवीसी मेंबर के रूप में काम कर रही है और अभी भी किस्टारम-गोलापल्ली इलाके में अभी सक्रिय है। रमन्ना खबर का जोड़ पी.सुंदरराज ने कहा कि रमन्ना ने बस्तर में माओवाद को बढ़ावा देने के लिए 30 साल से अधिक वक्त तक काम किया है। मौत को लेकर कोई पुख्ता जानकारी नहीं है। उसके मारे जाने से संगठन कमजोर होगा और उसके टूटने की काफी संभावना है। पुलिस अभी भी मुस्तैद हैं। जवान किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं।
Published on:
11 Dec 2019 02:24 pm
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