
महापौर के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सम्मेलन के लिए जाते भाजपा पार्षद
जगदलपुर। महापौर के खिलाफ भाजपा पार्षदों की ओर से लाया गया अविश्वास प्रस्ताव मंगलवार को कोरम के अभाव में गिर गया। कांग्रेस के २५ पार्षद अविश्वास प्रस्ताव के विशेष सम्मेलन से एक दिन पहले यानी सोमवार को ही रायपुर शिफ्ट कर दिए गए थे। इस तरह नगर निगम में 29 पार्षदों के बहुमत के बाद भी कांग्रेस ने सम्मेलन से पलायन कर जीत दर्ज कर ली। सम्मेलन के लिए दो तिहाई पार्षदों का होना जरूरी था, लेकिन भाजपा के ही 19 पार्षद सम्मेलन में पहुंचे। 33 पार्षदों का कोरम पूरा नहीं होने की स्थिति में जिला निर्वाचन अधिकारी और कलेक्टर ने विजय दयाराम ने अविश्वास प्रस्ताव के सफल नहीं होने की घोषणा कर दी। भाजपा के प्रस्ताव को कोरम के अभाव में खारिज कर दिया गया। इससे पहले भाजपा के सभी पार्षद जिला कार्यालय से रैली की शक्ल में कलेक्ट्रेट की तरफ बढ़े इस दौरान सभी महापौर के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। पार्षदों को पार्टी ने दोपहर 12 बजे ही कार्यालय पहुंचने का नोटिस दे रखा था। सभी तय समय पर पहुंचे और भाजपा कार्यालय से ही दोपहर का भोजन कर कलेक्ट्रेट की तरफ निकले। कलेक्ट्रेट के गेट पर सभी पार्षदों की लिस्ट थामे पुलिस अफसरों ने एक-एक के नाम का मिलान कर अंदर दाखिल होने नहीं दिया। नेता प्रतिपक्ष संजय पांडेय समेत सभी पार्षद अंदर गए। मीडिया को भी अंदर जाने नहीं दिया गया। दोपहर 3 बजे सभी भीतर दाखिल हुए और करीब पौने चार बजे सभी पार्षद बाहर आए। बाहर आते ही भाजपा पार्षदों ने महापौर के खिलाफ उग्र नारेबाजी की।
कांग्रेसी पार्षदों के अपहरण का जिक्र करते हुए नई तिथि की मांग की
सम्मेलन से बाहर निकले पार्षदों ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि उन्होंने मौके पर ही कलेक्टर को नई तिथि पर सम्मेलन बुलाने का आवेदन दिया। नेता प्रतिपक्ष संजय पांडेय ने कहा कि अपने अपने आवेदन में इस बात का स्पष्ट जिक्र किया कि महापौर और सभापति समेत सभी पार्षद अनुपस्थित हैं। संभव है कि उनका अपहरण कर लिया गया हो ऐसी स्थिति में नई तारीख दी जाए। हालांकि कलेक्टर ने नियमों का हवाला देते हुए आवेदन को खारिज कर दिया। इस पर भाजपा पार्षदों का कहना था कि कलेक्टर ने उनका सहयोग नहीं किया। जबकि जब मीडिया ने कलेक्टर से इस पर सवाल किया तो उनका कहना था कि अविश्वास प्रस्ताव के नियम में कहीं भी इस बात का उल्लेख नहीं है कि नई तारीख दी जाए। इसलिए जो किया गया नियम के अनुसार ही किया गया।
सम्मेलन से पहले कांग्रेसी पार्षद रायपुर में सीएम से कर रहे थे मुलाकात
अविश्वास प्रस्ताव से पहले रायपुर शिफ्ट किए गए कांग्रेसी पार्षदों मंगलवार दोपहर डेढ़ बजे एक तस्वीर सामने आई जिसमें सभी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से सीएम हाऊस में मुलाकात कर रहे थे। इस दौरान महापौर सफीरा साहू, सभापति कविता साहू समेत 25 पार्षद और विधायक रेखचंद जैन, क्रेडा अध्यक्ष मिथलेश स्वर्णकार, इंविप्रा उपाध्यक्ष राजीव शर्मा, अविश्वास प्रस्ताव के लिए कांग्रेस की तरफ से नियुक्त पर्यवेक्षक प्रमोद दुबे समेत अन्य वरिष्ठ कांग्रेसी मौजूद रहे। यहां पार्षदों ने सीएम के सामने महापौर पर विश्वास जताते हुए कहा कि वे महापौर के साथ हैं और यहां सीएम से औपचारिक मुलाकात के लिए पहुंचे हैं।
क्रॉस वोटिंग का खतरा तो था तभी रायपुर शिफ्ट किए गए
पिछले तीन दिनों के घटनाक्रम के बाद पूरे शहर में इस बात की चर्चा जोरों पर थी कि कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग का डर था इसलिए पार्षदों की शिफ्टिंग की गई। अगर कांग्रेस का एक भी पार्षद प्रस्ताव के पक्ष में वोट कर देता तो इससे कांग्रेस की रणनीति और एकजुटता पर सवाल उठते। कांग्रेस संगठन यही नहीं चाहता था और इसी वजह से सभी को ऐन वक्त पर रायपुर शिफ्ट किया गया। कांग्रेस के विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि 29 में से करीब 4 पार्षदों की निष्ठा पर संगठन को संदेह था। इसी वजह से सम्मेलन से पहले सभी रायपुर ले जाए गए।
भ्रष्टाचारी महापौर को बचाने पूरी कांग्रेस लामबंद इसलिए भागे
अपनी निश्चित हार जानकर कांग्रेस ने मैदान में लडऩे की बजाए कायरतापूर्वक पलायन करना ही उचित समझा। भ्रष्टाचार के आकंठ में डूबी महापौर के खिलाफ हमने अविश्वास प्रस्ताव लाया था। भाजपा पार्षदों के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार करते हुए सफ़ाई,पेयजल, स्वास्थ्य, निर्माण कार्य आदि विषयों पर हमने महापौर के खिलाफ अविश्वास जताया था। अगर महापौर के पास कोई जवाब होता तो वे फ़्लोर टेस्ट में शामिल होकर अपना पक्ष रखती। भ्रष्टाचारी महापौर को बचाने पूरी कांग्रेस लामबंद थी। एक दिन पहले तक अपने पार्षदों की एकता पर दंभ भरने वाली कांग्रेस को किन कारणों से 300 किलोमीटर दूर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पास रायपुर में शरण लेना पड़ा। रायपुर से आए पर्यवेक्षक ने जब बंद कमरे में कांग्रेसी पार्षदों की नब्ज़ टटोली तो उन्हें पार्षदों और महापौर के बीच जो सर फुटव्वल की स्थिति थी,उसका पता चला और इसके बाद ही उन्होंने उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव भाजपा के पक्ष में आने के डर से पलायन करवा दिया।
संजय पांडेय, नेता प्रतिपक्ष, नगर निगम
कांग्रेस का पलायन भाजपा की जीत
सत्ताधारी कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के पूर्व ही भारतीय जनता पार्टी के सामने अपनी हार स्वीकार कर ली है। कांग्रेस की महापौर के विरुद्ध भाजपा पार्षद दल द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव का सामना करने का हौसला व ताकत महापौर समेत कांग्रेस पार्षद दल नहीं जुटा पाया और सम्मिलन में शामिल न होकर पीठ दिखा कर पलायन कर गया। यह भाजपा की जीत व कांग्रेस की हार है। कांग्रेस की कलह जगजाहिर हो गई है। कांग्रेस को बताना चाहिये कि नगर निगम में सत्तासीन व बहुमत होने के बाद भी उन्हें किन कारणों से अपने 29 कांग्रेसी पार्षदों को महापौर समेत राजधानी रायपुर ले जाने विवश होना पड़ा। अविश्वास प्रस्ताव विफल नहीं हुआ है बल्कि कांग्रेस विफल हुई है और स्वयं कांग्रेस ने ही जनता के समक्ष यह बात साबित कर दी है।
आलोक अवस्थी, पार्षद
एक्ट में नई तिथि देने का उल्लेख नहीं
अविश्वास प्रस्ताव से जुड़े एक्ट में विपक्षी दल को नई तिथि देने के नियम का उल्लेख नहीं है। कोरम पूरा नहीं होने की वजह से सम्मेलन को रद्द कर दिया गया।
विजय दयाराम के, कलेक्टर, बस्तर
Published on:
29 Aug 2023 09:02 pm
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