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प्रतिबंध के बावजूद बाजारों में बेखौफ तरीके से हो रहा इस चीज का उपयोग, आप भी हों जाए सावधान वरना….

गांधी जयंती 2 अक्टूबर के दिन से देश भर में सरकार द्वारा सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूर्णत: प्रतिबंध लगा दिया है। इसके बावजूद अब तक प्रशासन प्रतिबंधित पॉलीथिन के उपयोग को पूर्णत: बंद नहीं करवा पाई है।

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प्रतिबंध के बावजूद बाजारों में बेखौफ तरीके से हो रहा इस चीज का उपयोग, आप भी हों जाए सावधान वरना....

प्रतिबंध के बावजूद बाजारों में बेखौफ तरीके से हो रहा इस चीज का उपयोग, आप भी हों जाए सावधान वरना....

सुकमा. सुकमा जिले में पॉलीथिन और प्लास्टिक पर प्रतिबंध को कोई असर नहीं दिख रहा है। धड़ल्ले स प्रतिबंध पॉलीथिन और प्लास्टिक का उपयोग किया जा रहा है। जबकि देश के प्रधानमंत्री 2022 तक देश से सिंगल यूज पॉलीथिन और प्लास्टिक से मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। उनके इस ऐलान के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई की जगह मौन बैठ हैं। बाजार में खुलेआम प्रतिबंध पॉलीथिन और प्लास्टिक उपयोग हो रहा है।

प्रतिबंधित पॉलीथिन को खपा रहे
गांधी जयंती 2 अक्टूबर के दिन से देश भर में सरकार द्वारा सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूर्णत: प्रतिबंध लगा दिया है। इसके बावजूद अब तक प्रशासन प्रतिबंधित पॉलीथिन के उपयोग को पूर्णत: बंद नहीं करवा पाई है। खास बात यह है कि प्रशासन ने सरकार के आदेश के पालन में अब तक प्रतिबंधित पॉलीथिन के स्टॉक को जब्त नहीं है। यही वजह है कि इन दिनों व्यापारी फुटकर विक्रेताओं के माध्यम से स्टॉक में रखी प्रतिबंधित पॉलीथिन को खपा रहे हैं। जिसका प्रभाव उपभोक्ताओं पर भी पड़ रहा है।

क्या है सिंगल यूज
ऐसा प्लास्टिक जिसका इस्तेमाल हम सिर्फ एक बार करते हैं और फिर वह डस्टबिन में चला जाता है। सीधे शब्दों मे कहें तो इस्तेमाल करके फेंक दी जाने वाली प्लास्टिक ही सिंगल यूज प्लास्टिक कहलाता है। इसे हम डिस्पोजेबल प्लास्टिक भी कहते हैं। हालांकि इसकी रीसाइक्लिंग की जा सकती है। इसका इस्तेमाल हम अपने रोजमर्रा के काम में करते हैं। जैसे प्लास्टिक बैग, प्लास्टिक की बोतलें, स्ट्रॉ, कप, प्लेट्स, फूड पैकजिंग में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक, गिफ्ट रैपर्स और कॉफी के डिस्पोजेबल कप्स आदि।

कार्यवाई का नहीं है खौफ
जिले में विगत वर्षों चालानी कार्रवाई की जा चूकी है। उसके बाद भी छोटे बडे दुकानों में प्रतिबंध पॉलीथिन उपयोग किया जा रहा है। सब्जी व्यापारी ने बताया कि रोजना कई लोग आते है। अधिकांश लोगों थैल लेकर नहीं आते है। इस कारण उन्होंने प्लास्टिक वाली थैली देना पडता है। नहीं देगें तो हमारे सामानों की ब्रिकी भी नहीं होगी। जुट वाली थैली रखने में बहुत ज्यादा पैसा खर्च आता है। ये भी रखते है लेकिन दिन भर में जितनी कमाई होनी वे इसी थैले कि पीछे खर्च आधा हो जाता है।

अफसरों के उदासीनता के चलते हो रहा उपयोग
जिले में पॉलीथिन पर प्रतिबंध के आदेश का जिन्हें पालन करना है वही सिंगल यूज पॉलीथिन व प्लास्टिक का मोह त्याग नहीं पा रहे हैं। अफसरों की उदासीनता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि छोटे बड़े दुकानदारों से लेकर चाय की दुकानों, होटलों में पॉलीथन का प्रयोग हो रहा है। वर्तमान में 50 माइक्रॉन से कम मोटाई के प्लास्टिक का उपयोग करने पर उसको जब्त कर लिए जाने का प्रावधान है। यही नहीं मानक से कम मोटाई की प्लास्टिक के निर्माण, स्टोरेज, निर्यात, वितरण, बिक्री या परिवहन के हिसाब से अलग अलग तरह की जुर्माना राशि तय कर दी गई है।

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