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डिमरापाल मेडिकल कॉलेज में लगातार हो रही मरीजों की संख्या कम, अब मान्यता पर मंडराने लगा खतरा!

पांच सौ बिस्तर मेडिकल डॉक्टरों के साथ ही दवाओं का भी टोटा बना हुआ है। यहां पर हार्ट, ब्रेन, लीवर, हाई ब्लड प्रेशर जैसे गंभीर मरीजों के लिए दवा ही नहीं है।

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डिमरापाल मेडिकल कॉलेज में लगातार हो रही मरीजों की संख्या कम, अब मान्यता पर मंडराने लगा खतरा!

डिमरापाल मेडिकल कॉलेज में लगातार हो रही मरीजों की संख्या कम, अब मान्यता पर मंडराने लगा खतरा!

जगदलपुर. डिमरापाल मेडिकल कॉलेज की मान्यता अब खतरे में नजर आ रही है। एमसीआई (मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया) के तहत रोजाना ओपीडी मरीजों की संख्या कम से कम ७०० होनी चाहिए, लेकिन यहां पर ४०० से अधिक ओपीडी पहुंच ही नहीं रहा है। बुधवार को ३६७, गुरुवार को ३१५, शुक्रवार को २२० और शनिवार को मेकाज लगभग २०० ओपीडी पर्ची कटा है।

गौरतलब है कि 400 करोड़ के मेडिकल कॉलेज कॉलेज में पर्याप्त फैकल्टी और इलाज की सुविधा नहीं है। ऐसे में यहां पर ओपीडी मरीजों की संख्या लगातार घटती जा रही है। मेकाज प्रबंधन अपनी मान्यता बनाए रखने एमसीआई के नियमों के तहत २२ विभागों का संचालन तो कर रहा है, लेकिन यहां पर आवश्कता अनुसार डॉक्टर, टेक्नीशियन और स्टाफ नहीं है। इसके अलावा मेडिकल कॉलेज में बहुत से ब्लड जांच व अन्य जांच की सुविधा ही नहीं है। वहीं विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी की वजह से गंभीर मरीजों को सीधे रायपुर रेफर कर दिया जाता है, जो मरीजों के लिए मुसीबत बनी हुई है। अब तक मेकाज प्रबंधन एमसीआई के निरीक्षण के दौरान अपनी मान्यता बचाने लीपापोती करते आ रहे हैं। यदि जल्द ही व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया गया, तो मान्यता खतरे में पड़ सकती है।

भर्ती मरीजों की भी घट रही संख्या
पांच सौ बिस्तर मेडिकल डॉक्टरों के साथ ही दवाओं का भी टोटा बना हुआ है। यहां पर हार्ट, ब्रेन, लीवर, हाई ब्लड प्रेशर जैसे गंभीर मरीजों के लिए दवा ही नहीं है। ऐसे में यहां पर आईपीडी (भर्ती मरीज) मरीजों की संख्या भी लगातार घट रही है। एमसीआई के नियमों के तहत रोजाना आईपीडी मरीजों की संख्या कम से कम ७० से ८० फीसदी होनी चाहिए, जो यहां पर नहीं है।

रोजाना 5 से 7 मरीज रेफर
मेडिकल कॉलेज में न्यूरोलॉजीस्ट, कार्डियोलॉजिस्ट और नेफ्रलॉजिस्ट नहीं होने की वजह से हर दिन 5 से 7 मरीज रेफर हो रहे हैं। इसमें ज्यादातर मरीज डेड इंज्यूरी के मरीज रेफर होते हैं। जगदलपुर से रायपुर की दूरी 300 किमी है। ऐसे में मरीजों को रायपुर मेडिकल कॉलेज पहुंचाने में ६ से ७ घंटे लगते हैं। इससे गंभीर मरीजों की रास्ते में ही मौत हो जाती है।

जेआर, एसआर डॉक्टरों की भी कमी
मिली जानकारी के अनुसार मेडिकल कॉलेज में 15 से 17 फीसदी फेकल्टी की कमी है। इसके अलावा जेआर (जूनियर रेसीडेंट) और एसआर (सीनियर रेसीडेंट) डॉक्टरों की भी कमी है। यहां पर करीब 18 फीसदी रेसीडेंट डॉक्टरों की कमी है। इतना ही नहीं रेडियोलॉजी विभाग में सिर्फ एक ही रेडियोग्राफर है। इससे सोनोग्राफी कराने मरीजों को लंबी वेटिंग से जूझना पड़ रहा है। इसी प्रकार की समस्या अन्य विभागों में भी है।

डॉ. यूएस पैकरा, डीन, जगदलपुर मेडिकल कॉलेज