
जगदलपुर नगर निगम
जगदलपुर। नगर निगम का राजस्व अमला लंबे वक्त के बाद शहर के उन दुकानदारों पर सख्त नजर आ रहा है जिन्होंने काफी वक्त से निगम की दुकानों का किराया नहीं पटाया है। आयुक्त हरेश मंडावी के आने के बाद से ही राजस्व वसूली को लेकर सख्ती नजर आ रही है। पहले तो उन्होंने अमले की बैठक लेकर लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई की उसके बाद अब वे फील्ड में उतरकर दुकानदारों पर कार्रवाई करवाते नजर आ रहे हैं। इस कार्रवाई से उन दुकाकनदारों में हड?ंप मचा हुआ है जो किराया जमा करने में दुकान आवंटन के बाद से ही मनमानी करते रहे हैं। बताया जा रहा है निगम को अभी मुख्यमंत्री स्वावलंबी योजना और गुमटी योजना के तहत आवंटित दुकानों का काफी किराया वसूलना है। हालांकि दो दिन पहले जिन दो दुकानों का आवंटन रद्द किया गया है वह इन दोनों योजनाओं से जुड़ी हुई नहीं थीं। दुकानें बैलाकोठा स्थित निगम के कॉम्प्लेक्स में संचालित हो रही थीं। इनके अलावा यहां और भी कुछ दुकानें हैं जिनका किराया बकाया है इन पर भी आगे कार्रवाई की बात राजस्व अमले के अधिकारी कह रहे हैं।
अब या तो किराया पटाने वालों की लाइन लगेगी या कार्रवाई
आवंटन रद्द किए जाने की कार्रवाई लंबे वक्त के बाद हुई है। इससे पहले निगम सिर्फ नोटिस देकर या फिर किराए का कुछ प्रतिशत जमा करवाकर दुकानदारों को राहत दे देता था लेकिन अब जबकि आवंटन रद्द किए जाने की कार्रवाई हुई है तो या तो निगम में किराया जमा करने के लिए बकायदारों की लाइन लगेगी या फिर निगम दुकानदारों पर कार्रवाई तेज करेगा। निगम के सूत्र बताते हैं कि आयुक्त ने दुकानदारों को कार्रवाई का संदेश देने के लिए आवंटन रद्द करने की कार्रवाई की है।
सोमवार से दुकान-दुकान जाकर करेंगे वसूली
निगम के राजस्व में इजाफा करने और बकाया वसूली को गंभीरता से करने के निर्देश पूर्व में निगम आयुक्त ने दिए थे। इस आदेश को अमल में लाने के लिए वे लगातार राजस्व विभाग की मॉनिटरिंग भी कर रहे हैं। राजस्व वसूली के मामले में आयुक्त की सख्ती को देखते हुए अब राजस्व अधिकारी भी इसे गंभीरता से लेते दिख रहे हैं। बताया जा रहा है कि निगम का राजस्व अमला बकाया वसूली के लिए सोमवार से अभियान शुरू करेगा। इसके तहत दुकान-दुकान जाकर वसूली की जाएगी।
पहुंच का इस्तेमाल कर किराया नहीं पटाते
शहर में सरकारी दुकानों को आवंटित करवाने का एक ट्रेंड है। इसके तहत पहले तो जिस योजना के तहत दुकानें बनती है उनके हितग्राहियों को दुकानें आवंटित नहीं होती। योजना के तहत मिलने वाली छूट भी रसूखदार ले लेेते हैं और बाद में पहुंच का इस्तेमाल कर किराया भी नहीं पटाते हैं। शहर में निगम की ऐसी कई दुकानें हैं जिनका किराया आवंटन के बाद से निगम को नहीं मिला है। अब दावा किया जा रहा है कि ऐसी ही दुकानों पर कार्रवाई पहले की जाएगी।
निगम की आय का एक बड़ा हिस्सा दुकानों का किराया
निगम को उसकी दुकानों से एक बड़ी आय प्राप्त होती है। निगम की वित्त व्यवस्था का यह एक बड़ा हिस्सा है। दुकानों का निर्माण भी इसी उद्देश्य से किया जाता है ताकि निगम की आय बढ़े लेकिन जब किराए की वूसली अटकती है तो इसका असर निगम की पूरी वित्तीय व्यवस्था पर पड़ता है। यही वजह है कि निगम के रास्व अमले पर आयुक्त सख्त नजर आ रहे हैं।
गलत तरीके से दुकानों के आवंटन का पत्रिका पहले उठा चुका मुद्दा
निगम की ओर से गलत तरीके से दुकानें आवंटित किए जाने का मुद्दा पूर्व में पत्रिका ने प्रमुखता से उठाया था। पत्रिका ने बताया था कि किस तरह से बेरोजगारों के लिए लाई गई योजना का लाभ रसूखदार उठा रहे हैं। तब तत्कालीन निगम आयुक्त प्रेम कुमार पटेल ने ऐसी दुकानों पर कार्रवाई के लिए जांच कमेटी भी बनाई थी लेकिन समय के साथ इस मामले की फाइल दबा दी गई। बताया जा रहा है कि निगम आयुक्त ने ऐसी दुकानों की फाइल ंभी दोबारा निकालने कहा है। शहर में सैकड़ों ऐसी दुकानें है जो बनाई तो किसी योजना के तहत थीं लेकिन अब वे जिनके हाथ में हैं वह उस योजना के पात्र ही नहीं हैं।
Published on:
02 Sept 2023 10:06 pm
