
बस्तर स्टे होम
Bastar Stay home craze: देश और दुनिया में बस्तर(Bastar) हमेशा से ही आकर्षण व जिज्ञासा का केंद्र रहा है। अब समय बदल गया है बस्तर को करीब से जानने, देखने और समझने देशी विदेशी सैलानी आदिवासियों के बीच ही रहने की सुविधा का लाभ ले रहे हैं। उनके लिए ग्रामीणों ने होम स्टे की सुविधा तैयार की है। विदेशियों व देश के सैलानियों(Tourists) के लिए होम स्टे होमStay home) यहां की संस्कृति, रीति रिवाज खानपान और जीवन शैली को करीब से देखने, जानने और समझने का अच्छा जरिया बन गया है।
बीते दो महीनों में यहां 6 से अधिक देशों के 40 व देश के महानगरों से सैकड़ों मेहमान पहुंच चुके हैं। बस्तर (Bastar)के घने जंगल के बीच दर्जनों गांवों में स्टे होम की व्यवस्था है। यहां आने वाले फॉरेनर्स को घने जंगलों के बीच बनी झोपड़ियां(Stay home) विदेशियों को आकर्षित कर रहीं है। देश-विदेश के पर्यटक अब बस्तर के गांवों में 2 से 7 दिनों तक समय बीता रहे हैं।
कांगेर घाटी में सबसे ज्यादा सैलानी
स्टे होम(Stay home) के प्रति सबसे ज्यादा पर्यटक ब्रिटेन, फ्रांस, स्पेन, जर्मनी, अमरीका, जापान,रूस के अलवा चाइनीज के बीच सबसे अधिक क्रेज है। यहां आने वालों में कई रिसर्चर, फोटोग्राफर और घूमने में रुचि रखने वाले होते हैं। बस्तर के कांगेरवैली (Kanger valley) में स्टे होम में रुकने वाले सबसे अधिक विदेशी सैलानी पहुंचते हैं। यहां के गुडिय़ापदर, में रुकने की सबसे अधिक डिमांड होती है। इसके अलावा छोटेकवाली, चिलकुटी, मिलकुलवाड़ा, पुसपाल, व नेशनल पार्क में होम स्टे की अच्छी है।
बस्तरिया संस्कृति, तीज-त्योहार व जीवन शैली में रुचि
बस्तर(Bastar) के आदिवासियों के साथ होम स्टेStay home) संचालित करने वाले शकील रिजवी ने बताया कि यहां देश विदेश से आने वाले पर्यटक यहां के प्राकृतिक सौंदर्य के अलावा यहां की आदिवासी संस्कृति, कला, नृत्य और जीवन शैली को खूब पसंद कर रहे हैं। यहां आने वाले अधिकांश विदेशी पर्यटक बस्तर के प्राचीन रीति रिवाज, तीज त्योहार, पूजा पाठ और सादा भोजन के प्रति अधिक रुचि दिखाते हैं। यहां का गोदना व मरने के बाद बनाये जाने वाले मृतक स्तंभ उनके लिए आकर्षण का केंद्र होते हैं।
सौंदर्य व संस्कृति को जानने का सबसे अच्छा माध्यम
धम्मशील गणवीर, डायरेक्टर, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान ने कहा, होम स्टेStay home) बस्तर के सौंदर्य व संस्कृति को जानने का सबसे अच्छा माध्यम है। यह विश्व के चुनिंदा स्थानों में से एक है जहां आज भी आदिवासी अपनी स्थानीय रीति रिवाजों के साथ जीते हैं। इस अद्भुत व्यवस्था का अनुभव लेने सैलानी पहुंचते हैं। यह स्थानीय लोगों के व्यवसाय व रोजगार का अच्छा साधन भी बनता जा रहा है।
Published on:
08 Jan 2023 06:41 pm
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