
सहायता समूहों की महिलाओं के लिए वरदान बनी इमली
दन्तेवाड़ा . अपने खट़्टे स्वाद के लिए मशहूर वनोपज इमली दंतेवाड़ा की महिला स्व सहायता समूह की महिलाओं के जीवन में इन दिनों मिठास घोल रही है। इमली की प्रोसेसिंग व पैकेजिंग से मिल रही आमदनी के जरिए यह संभव हो सका है। जिला प्रशासन एवं वन विभाग दंतेवा़डा द्वारा छत्तीसगढ़ शासन की न्यूनतम समर्थन मूल्य नीति को जिले में क्रियान्वयन करते हुए लघु वनोपज (इमली) का समर्थन मूल्य पर खरीदी, मूल्य संवर्धन की दिशा एवं स्व-रोजगार योजना के तहत महिला स्व-सहायता समूहों को रोजगार देने के उद्वेश्य से इमली संग्रहण, प्रसंस्करण व विपणन" परियोजना प्रारंभ किया गया। इसके पहले ग्रामीण इमली को औने-पौने दाम पर कोचियों को बेच देते थे, जिसके चलते उन्हे कम दाम मिलते थे। दरअसल, जिला वनोपज यूनियन अंतर्गत वर्ष 2021-22 में इमली के समर्थन मूल्य 33 रूपए प्रति किलो की दर से महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से 15 हजार 422 क्विटल इमली की खरीदी गई। जिससे क्षेत्र के लगभग 12 हजार 400 ग्रामीण परिवारों को 509 लाख रूपए पारिश्रमिक के तौर पर भुगतान किया गया। इमली संग्राहकों ने बताया कि समर्थन मूल्य पर इमली खरीदी से उनकी और परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है। इमली खरीदी में 78 महिला स्व-सहायता समूहों को 8.31 लाख रूपए का आर्थिक लाभ प्राप्त हुआ।
प्रसंस्करण से हुआ वैल्यू एडिशन
प्रसंस्करण केन्द्र के माध्यम से महिला स्व-सहायता समूहों को प्रशिक्षण उपरांत इमली प्रोसेसिंग का कार्य कराया जा रहा है। वर्तमान में जिले के 05 प्रसंस्करण केन्द्रों में संलग्न 75 महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा कुल 22000 क्विंटल इमली का प्रसंस्करण कर 11000 क्विटल फूल इमली निर्मित किया जा चुका है। फूल इमली से चपाती इमली, इमली सॉस एवं अन्य खाद्य उत्पाद निर्माण से वनोपज का मूल्य वर्धन कर विक्रय जा रहा है। प्रसंस्करण कार्य में संलग्न स्व-सहायता समूहों को 146.25 लाख रूपये का आर्थिक लाभ प्राप्त हुआ है।
इमली की प्रोसेसिंग व पैकेजिंग से कमा रही आमदनी
महिला स्व-सहायता समूहों के सदस्यों द्वारा निर्मित फूल इमली यानि बीज रहित इमली, चपाती इमली, इमली सॉस आदि की मार्केटिंग राज्य स्तर पर छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ अधिकृत छत्तीसगढ़ हर्बल ब्रांडिंग के माध्यम से किया जा रहा है। इसके विक्रय के लिए स्थानीय संजीवनी मार्ट, एनडब्ल्यूएफपी मार्ट व आन्ध्रप्रदेश, तेलंगाना, उड़ीसा राज्य के व्यापारियों के माध्यम से भी इसकी बिक्री हो रही है। इमली संग्रहण, प्रसंस्करण व मार्केटिंग की बेहतर व्यवस्था से जिले के इमली संग्राहको को आर्थिक लाभ एवं महिलाओं को सतत् रोजगार प्राप्त हो रहा है, जिससे उनका जीवन खुशहाल हुआ है।
Published on:
21 May 2022 02:07 pm
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