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बस्तर में आतंक के पर्याय रहे सवा करोड़ इनामी नक्सली रमन्ना युग का ऐसे हुआ अंत

सवा करोड़ का इनाम घोषित था रमन्ना पर, 36 वर्षो से माओवादी संगठन में था सक्रिय, केन्द्रीय कमेटी के प्रवक्ता विकल्प ने की पुष्टि

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बस्तर में आतंक के पर्याय रहे सवा करोड़ इनामी नक्सली रमन्ना युग का ऐसे हुआ अंत

बस्तर में आतंक के पर्याय रहे सवा करोड़ इनामी नक्सली रमन्ना युग का ऐसे हुआ अंत

जगदलपुर. दण्डकारण्य में माओवादी आंदोलन के आधार स्तंभ रहे रावला श्रीनिवास उर्फ रमन्ना युग का अंत हो गया। माओवादियों की केन्द्रीय कमेटी के प्रवक्ता विकल्प ने फोन पर बयान जारी कर रमन्ना की मौत की पुष्टि की है। विकल्प के मुताबिक रमन्ना लम्बे समय से बीमार चल रहा था। सात दिसम्बर की रात 10 बजे तेलंगाना से सटे बीजापुर- सुकमा जिले की सीमा पर उसने अंतिम सांस ली। रमन्ना की मौत को माओवादी आंदोलन और संगठन की बड़ी क्षति बताया।

बेटीलंका के जंगल में उसका अंतिम संस्कार किया
माओवादी प्रवक्ता के मुताबिक रमन्ना 36 वर्षो से संगठन में सक्रिय था। उसकी पत्नि सावित्री व पुत्र कट्टम रमेश भी वर्तमान में माओवादी संगठन में सक्रिय हैं। सूत्रों के मुताबिक रमन्ना लंबे समय से बीमार चल रहा था। उसे इलाज के लिए बाहर भी ले जाया गया था। विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा जवाब दिये जाने के बाद से ही माओवादियों ने रामन्ना को पामेड़ थाना क्षेत्र के ग्राम पालागुड़ा में रखा था जहां माओवादी चिकित्सकों की देखरेख की जा रही थी। यहीं पर रामन्ना का निधन हुआ। सुरक्षा की दृष्टि से माओवादियों ने इसी इलाके के बेटीलंका के जंगल में उसका अंतिम संस्कार किया।

पांच राज्यों में फैला था रमन्ना का खौफ
माओवादी नेता रामन्ना पर बस्तर में तीन दर्जन से अधिक अपराध दर्ज थे। इस कारण विभिन्न मामलों में उस पर पुलिस ने लगभग सवा करोड़ का इनाम घोषित कर रखा था। ताड़मेटला, रानीबोदली सहित कई वारदातों का वह मास्टर माइंड था। दण्डकारण्य के आधार इलाके तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़ तथा महाराष्ट्र में भी इस पर कई मामले दर्ज है। सभी राज्यों में उस पर इनाम घोषित कर रखा है।

वारंगल में जन्मा तथा बस्तर में सक्रिय रहा
माओवादी नेता रामन्ना वर्ष 1983 से माओवादियो की छात्र शाखा स्टुडेंट रेडिकल्स में सक्रिय हो कर आंध्र प्रदेश में पांच वर्षो तक दलम में सक्रिय रहा। उसके पश्चात वह बस्तर आ गया जहां वह कोंटा क्षेत्र के कई गांव में लम्बे समय तक सक्रिय था। 80 के दशक में वह माओवादी संगठन के पीपुल्सवार के क्रूर सदस्य के रुप में जाना जाता था। जन अदालत लगा कर लोगों की हत्याएं करना उसका शगल था।

कई माओवादी कमांडर रामन्ना के समर्थक
मृत नक्सली नेता रामन्ना अपने संगठन में काफी लोकप्रिय रहा है। करीब दर्जन भर से अधिक माओवादी कमांडर उसके समर्थक है। वह स्वंय एकमात्र ऐसा माओवादी नेता रहा है जो कि दलम सदस्य से लेकर कमांडर डीवीसी, एसजेडसी सदस्य के बाद कुछ समय पूर्व रामन्ना को माओवादियों की केन्द्रीय कमेटी का सदस्य मनोनीत किया गया था।

पी.सुंदरराज, आईजी बस्तर