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अक्षय तृतीया पर पहली बार शादी का मुहूर्त नहीं, वर्षों बाद बन रहा ये संयोग

Chhattisgarh News : इस दिन ही भगवान विष्णु के अंशावतार महर्षि वेदव्यास ने महाभारत को लिखना शुरू किया था। इसी दिन ही अक्षय तृतीया ( Akshaya Tritiya) पर मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरण हुआ था।

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जगदलपुर. Chhattisgarh News : अक्षय तृतीया ( Akshaya Tritiya) को अनंत-अक्षय-अक्षुण्ण फलदायक कहा जाता है। जो कभी क्षय नहीं होती उसे अक्षय कहते हैं, इस दिन को स्वयंसिद्ध मुहूर्त माना गया है। इस दिन ही भगवान विष्णु के अंशावतार महर्षि वेदव्यास ने महाभारत को लिखना शुरू किया था। इसी दिन ही अक्षय तृतीया पर मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। बता दें कि छत्तीसगढ़ में ज्यादातर विवाह अक्षय तृतीया के मौके पर ही होते हैं। इस दिन किसी मुहूर्त होना जरूरी नहीं होता है। दूसरी वजह यह है कि प्रदेश में ज्यादातर किसान है, और उन्हें इसी समय काम से राहत मिलने के बाद शुभ कार्य करते हैं, लेकिन इस बार ग्रह नक्षत्रों के चलते परेशानी में डाल दिए हैं।

अक्षय तृतीया पर श्रीहरि विष्णु के अवतार भगवान परशुराम का जन्म हुआ था। यही वजह है कि इस दिन का हिंदू धर्म में इतना महत्व है कि किसी भी शुभ या फिर मांगलिक कार्य के लिये मुहूर्त की आवश्यकता नहीं होती।हालांकि यह माना जाता रहा है कि अक्षय तृतीया पर किसी विशेष मुहूर्त को देखने की जरुरत नही होती है।

खरमास समाप्त लेकिन मांगलिक कार्य नहीं

पंडित दिनेश दास ने बताया कि जब सूर्य धनु या फिर मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तो खरमास आरंभ हो जाता है। इस वर्ष खरमास 15 मार्च को शुरू हो गए थे, जो पूरे एक माह चल चलेंगे। 14 अप्रैल को दोपहर 3 बजकर 12 मिनट में सूर्य मेष राशि में प्रवेश करेंगे वैसे ही खरमास समाप्त होगा। शास्त्रों के अनुसार खरमास समाप्त होते ही मांगलिक और शुभ कार्य होना शुरू हो जाएगा। लेकिन इस साल 14 अप्रैल को खरमास समाप्त होने के बाद भी इस माह शादी-विवाह, मुंडन, छेदन जैसे मांगलिक काम नहीं होंगे।

खरमास समाप्त होने के बाद क्यों नहीं होंगे मांगलिक कार्य

विवाह जैसे मांगलिक काम के लिए खरमास न होने के साथ-साथ गुरु ग्रह का उदय होना बेहद जरूरी है। ऐसे में 28 मार्च को गुरु अस्त हो गए थे। इसके बाद 22 अप्रैल को मेष राशि में गुरु प्रवेश करेंगे। लेकिन अस्त अवस्था में होंगे। फिर 27 अप्रैल को सुबह 2 बजकर 7 मिनट पर मेष राशि में ही उदय हो जाएंगे। इसके बाद से मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे।

शादी-विवाह का मुहर्त नहीं

ज्योतिषाचार्य पंडित दिनेश दास के अनुसार वर्षों बाद ऐसा संयोग बना है कि इस बार अक्षय तृतीय को शादी का मुहूर्त नहीं है। 27 अप्रैल तक गुरु अस्त है। गुरु अस्त होने की वजह से विवाह जैसे शुभ कार्य वर्जित माना गया है। इस वर्ष अक्षय तृतीय को शादी का मुहूर्त नहीं है।

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