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शासन को संशय, विश्वविद्यालय कहां से लाएगा इतना पैसा, जानिये क्या है मामला?

नियमितीकरण को लेकर उच्चशिक्षा विभाग ने मांगी प्रदेश के सभी विवि से जानकारी, जेयू के 250 से अधिक कर्मचारी संकट में, नियमों में बंधे कुलसचिव से लगाई गुहार।

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rishi jaiswal

Dec 10, 2016

jiwaji university

jiwaji university

ग्वालियर।
प्रदेश की सरकारी यूनिवर्सिटी
में
15-20 वर्षों से
काम कर रहे कर्मचारियों के
नियमितीकरण में शासन का नया
आदेश अडग़ा बनने वाला है। इसके
तहत उच्चशिक्षा मंत्रालय ने
सभी कुलसचिवों से आय और व्यय
का ब्योरा मांगा है। खासकर
वेतन की वर्तमान राशि और
कर्मचारियों के परमानेंट के
बाद बढ़ी राशि का हिसाब अलग
से मांगा गया है। साथ ही विपरीत
परस्थितियों में बढ़ी हुई
राशि का भुगतान कैसे किया
जाएगा
, इसके बारे
में विस्तार से जानकारी मांगी
गई है।

इस
आदेश ने जीवाजी यूनिवर्सिटी
(जेयू) सहित
प्रदेश के सभी सातों विवि के
कुलसचिवों की टेंशन बढ़ा दी
है। हालांकि जेयू कुलपति प्रो
.
संगीता शुक्ला कर्मचारियों
की नियमितीकरण के मामले को
जल्द से जल्द सुलझाना चाहती
है। ईसी मेम्बरों ने भी
2007
से पूर्व के सभी
कर्मचारियों को नियमित करने
के लिए हरी झंडी दे दी है। बीते
दिनों कुलपति ने कुलसचिव डॉ
.
आनंद मिश्रा को नियमितीकरण
की प्रक्रिया जल्द से जल्द
पूरी करने के निर्देश भी दिए
हैं
, पर शासन के
नियमों में बंधे कुलसचिव के
सामने बड़ी समस्या खड़ी हो
गई है। एक तरफ कर्मचारियों
की आशाएं हैं तो दूसरी तरफ
शासन के कठोर नियम। फिलहाल
डॉ
. मिश्रा ने मामला
जनवरी तक टाल दिया है।

यह
है मामले का सबसे बड़ा पेच

अधिकारियों
के अनुसार जेयू वर्तमान में
करीब एक करोड़ रुपए प्रतिमाह
वेतन पर खर्च करता है
, लेकिन
जैसे ही करीब
250 से
अधिक कर्मचारी रेगुलर हो
जाएंगे तो प्रत्येक कर्मचारी
को करीब
10 हजार रुपए
अतिरिक्त भुगतान करना होगा।
इस हिसाब से जेयू का प्रतिमाह
खर्च लगभग तीन करोड़ के आसपास
पहुंच जाएगा
, जो
पूर्व की रकम से करीब तीन गुना
ज्यादा है। इनती बड़ी राशि
हमेशा ही विवि जुटा पाएगा
,
इसके बारे में शासन
संशय में है।

इसलिए
हो रही ठेका प्रथा लागू

अधिकारियों
का कहना है कि वर्तमान में
प्रदेश के सभी विवि में छात्र
संख्या घट रही है। रिसर्च को
छोड़कर बाकी विषयों में हालात
अच्छे नहीं हैं। छात्रों की
कम संख्या के कारण जहां कई
निजी कॉलेज बंद होने की कगार
पर हैं
, वहीं 60
प्रतिशत सरकारी कॉलेज
पहले से ही खस्ता हाल में चल
रहे हैं। शासन नहीं चाहता कि
किसी भी स्थित में बढ़े हुए
कर्मचारियों का वेतन वो अपने
खाते से दे
, इसलिए
विवि के साथ खुद मंत्रालय ने
ठेके पर कर्मचारियों की नियुक्ति
शुरू कर दी है।

'वर्तमान
में हम एक करोड़ रुपए मासिक
वेतन पर खर्च करते हैं
, हमें
करीब
250 से अधिक
कर्मचारियों को नियमित करना
है
, जिसके कारण औसत
खर्चा तीन करोड़ के आसपास आ
रहा है। शासन ने हमसे जानकारी
मांगी है। कोशिश करेंगे कि
प्रक्रिया जल्द पूरी हो
,
लेकिन नियमों के फेर
में कुछ भी कहना मुश्किल है।'

- डॉ.
आनंद मिश्रा,
कुलसचिव,
जेयू

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