सेना के जवानों की शहादत पर बस सरकारी निंदा का दौर चले, तो सवाल उठता है. अमरनाथ से लौट रहे यात्रियों पर आतंकी हमला हो, तो सवाल उठता है. शांति बहाली के लिए तैनात सेना पर देश के ही बाशिंदे पत्थर बरसाएं, तो सवाल उठता है. देश के सर्वोच्च पद के लिए चुनाव और जाति का राग अलापा जाये.. तो सवाल उठता है. नोटबंदी के कड़े फैसले के बाद भी अर्थव्यवस्था पटरी पर न आए.. तो सवाल उठता है.