
जयपुर के अभिनव को मिला दो करोड़ का पैकेज, कैलिफोर्निया की सॉफ्टवेयर कंपनी में बने सीनियर मैनेजर
पुष्पेंद्र शर्मा / जयपुर. जेईई में सात हजार रैंक आई तो टॉप आईआईटी से कम्प्यूटर साइंस (सीएस) में बीटेक करने का सपना पूरा नहीं हो पाया। रैंक के आधार पर आईआईएससी बेंगलूरु में एरोस्पेस साइंस ब्रांच मिल रही थी लेकिन जयपुर के अभिनव पंवार ने वीआईटी वेल्लोर से सीएस (कम्प्यूटर साइंस) ब्रांच को चुना। बीटेक के बाद तीन साल तक बेंगलूरु में जॉब की। इसके बाद अमरीका की टेक्सस यूनिवर्सिटी की एमबीए परीक्षा की तैयारी की। जिस कोर्स में दुनिया से 300 और भारत से केवल 20 छात्र चयनित होते हैं, अभिनव उनमें से एक रहे।
एमबीए करने के बाद अभिनव को कैलिफोर्निया की सॉफ्टवेयर कंपनी एडॉब में नौकरी मिली। कंपनी ने उन्हें दो करोड़ रुपए सालाना का पैकेज दिया है। महज 29 साल की उम्र में वह सीनियर मैनेजर बन चुके हैं। पत्रिका से खास बातचीत में अभिनव ने बताया, मुझे कम्प्यूटर और मैनेजमेंट पसंद है। इंग्लिश और मैथ्स को मैंने अपने पैशन के लिए फॉलो किया। कंपनी को बिजनेस ग्रोथ देने और नए ग्राहक बनाने के लिए मैंने काफी काम किया। डेटा एनालिटिक्स की मदद से कंपनी को लगभग 30 मिलियन यूएस डॉलर का फायदा पहुंचाया। काम के प्रति मेरी मेहनत को देखते हुए उन्होंने मुझे इस उम्र में सीनियर मैनेजर का पद दिया है। अब कंपनी में वाइस प्रेसिडेंट बनने का सपना है।
रैंक मायने नहीं रखती
मूलत: सवाईमाधोपुर निवासी अभिनव की स्कूलिंग जयपुर से हुई है। उनके पिता पी. एस. पंवार सरस डेयरी के मैनेजर (मार्केटिंग) पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। मां कृष्णा पंवार गृहिणी हैं। अभिनव कहते हैं, रैंक नहीं बल्कि जुनून मायने रखता है। अभी कई छात्र जेईई की तैयारी कर रहे हैं। उन्हें कहना चाहता हूं कि हो सकता है आईआईटी न जा पाओ लेकिन अपना पैशन हमेशा फॉलो करना चाहिए। यही मुकाम दिला देता है। अभिनव कहते हैं, सवाईमाधोपुर से जयपुर और फिर कैलिफोर्निया तक का सफर काफी सिखाने वाला रहा। पिता मेरी प्रेरणा रहे हैं।
Published on:
08 Feb 2020 08:01 am
