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मिसाल की पेश: सगाई में 21 लाख की गाड़ी और 11 लाख नकद ठुकराए, 101 रुपए से किया शगुन

- उपखंड अधिकारी रामसुख गुर्जर ने किया बेटे की शादी में दहेज लेने से इनकार - गाड़ी व नकदी वधु पक्ष को लौटाए

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मिसाल की पेश: सगाई में 21 लाख की गाड़ी और 11 लाख नकद ठुकराए, 101 रुपए से किया शगुन

मिसाल की पेश: सगाई में 21 लाख की गाड़ी और 11 लाख नकद ठुकराए, 101 रुपए से किया शगुन

कोटा. रावतभाटा. घर के बाहर लग्जरी गाड़ी और तिजौरी में नकदी, किसे अच्छी नहीं लगती। वह भी जब बेटे की शादी में दहेज में मिल रहा हो, लेकिन रावतभाटा उपखंड अधिकारी रामसुख गुर्जर दहेज की मानसिकता को नकारते हुए वधु पक्ष को साफ कह दिया कि उन्हें तो बेटी के रूप में बहू चाहिए। उन्होंने शनिवार को बेटे की सगाई में वधु पक्ष की ओर से दी गई 21 लाख की लग्जरी कार और टीके में दिए 11 लाख रुपए नकद का शगुन लौटा दिया और मात्र 101 रुपए के शगुन से सगाई की। दूल्हा इंजीनियर है और बहू एमकॉम, बीएड है। मूलत: अजमेर के रहने वाले रामसुख गुर्जर के बेटे मयंक का विवाह रविवार को सूरत की मुक्ता से होगा। शनिवार को सगाई का आयोजन था। सगाई में वधु मुक्ता के बिजनेसमैन पिता ने टीका कर 21 लाख की कार व 11 लाख नकद राशि दामाद को दी, लेकिन रामसुख गुर्जर और दुल्हे ने समाज के सामने कार व नकद राशि यह कहते हुए लौटा दी कि उन्हें बिना दहेज के केवल बहू चाहिए। मयंक ने शगुन के तौर पर मात्र 101 रुपए लिए।

पड़ गए संशय में

पिता-पुत्र ने जब कार व नकदी लेने से इनकार किया तो वधु पक्ष और सगाई में आए मेहमान संशय में पड़ गए। फिर जब हकीकत पता चली तो सभी ने खुले दिल से उनकी सराहना की। वर पक्ष के इस निर्णय से खुशी और गर्व से दुल्हन के परिजनों की आंखें डबडबा गई।

बहू और बेटी एक समान

पत्रिका से बातचीत में रामसुख गुर्जर ने बताया कि दहेज प्रथा समाज में कलंक के समान है। दहेज परिवार में झगड़े व परिवार के विघटन का कारण बन जाता है। कई बेटियों को यह पीड़ा झेलनी पड़ रही है। अपने पिता की पीड़ा को देखकर भी बेटी को भी दर्द होता है। समाज की कुरीतियां दूर होनी चाहिए। सभी को यह बात समझने की आवश्यकता है।