राजस्थान के राज्य पक्षी ग्रेट इंडियन बस्टर्ड गोडावण संरक्षण के लिए वन विभाग जोधपुर के वन्यजीव मंडल को वर्ष 2015-2016 के लिए 251 लाख मिले हैं।
बाड़मेर जैसलमेर के कुल 3162 वर्ग किमी क्षेत्र में फैले राष्ट्रीय मरु उद्यान में पिछले डेढ़ दशक से गोडावण की संख्या में निरन्तर कमी के चलते लुप्त होने के कगार पहुंच गए थे। राज्य सरकार ने वर्ष 2013 जून में गोडावण संरक्षण के लिए 12 करोड़ 90 लाख की जीआईबीपी (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड प्रोजेक्ट) शुरू किया था।
क्षेत्र में बढ़ता जैविक दबाव और मानवीय हलचल से गोडावण के भोजन का प्रमुख आधार भी निरंतर समाप्त हो रहा है। जमीन पर अंडे देने के करण सरिसृप का भोजन बनने और पालतू मवेशियों के पैरों तले कुचले जाने से भी इनकी संख्या में बढ़ोतरी न होना प्रमुख कारण माना जाता है।
चार दशक पूर्व थार रेगिस्तान में सम, सुदाश्री, फुलिया, म्याजलार, खुड़ी, सत्तो आदि क्षेत्र में गोडावण की संख्या करीब 1260 थी जो घटकर अब मात्र 44 हो गई है। पिछले पांच साल में गोडावण की स्थिति
2010 ----45
2011----52
2012----60
2013----44
2014----40
2015----44
माइक्रोचिप लगाने की योजना
गोडावण के विचरण क्षेत्र का पता लगाने के लिए माइक्रो चिप लगाने की योजना है। देहरादून के भारतीय वन्यजीव संस्थान की टीम को इस बाबत पत्र लिखा गया है। गुजरात में प्रस्तावित गोडावण प्रजनन केन्द्र को भी डेजर्ट नेशनल पार्क में शिफ्ट के प्रयास किए जा रहे है।
निजी बैंक भी देगा 40 लाख
गोडावण संरक्षण जनचेतना जागृति व क्लोजर निर्माण के लिए निजी क्षेत्र के यस बैंक ने 40 लाख रुपए सहयोग की घोषणा की है। प्रथम चरण में बैंक ने 7.09 लाख दिए जिसे खर्च कर दिया गया।
उपयुक्त बनाएंगे
जीआईबीपी (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड प्रोजेक्ट) के लिए इस बार 251 लाख की राशि जारी हुई है। इस राशि से गोडावण हैबीटाट को उपयुक्त बनाया जाएगा ताकि इनकी वंशवृद्धि हो और उन्हें विलुप्त होने से बचाया जा सके। इसके लिए पूरे क्षेत्र में कड़ी नजर रखी जा रही है।
-गोबिन्द सागर भारद्वाज, मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव ) जोधपुर