
नववर्ष 2023 में व्रत-त्योहारों की शुरुआत दो जनवरी को पुत्रदा एकादशी के साथ होगी। वहीं, करीब तीन वर्ष बाद अधिकमास आने के कारण इस बार 24 के स्थान पर कुल 26 एकादशी व्रत रहेंगे तथा समूचे वर्ष आस्था का वास रहेगा। हिंदू पंचांग व नवसंवत्सर के अनुसार इस वर्ष में अधिक मास सहित कुल 13 हिंदू महीने आएंगे।
ज्योतिषाचार्य पं.दामोदर प्रसाद शर्मा ने बताया कि तिथियों के फेर के चलते अधिकमास के बाद आने वाले सभी प्रमुख त्योहार-पर्व 10-15 दिन की देरी से आएंगे। अधिक मास 18 जुलाई से शुरू होकर 16 अगस्त तक रहेगा। इस कारण इसके बाद आने वाले त्योहारों और पर्वों के लिए भक्तों को थोड़ा और इंतजार करना होगा।
सावन : 4 जुलाई से लेकर 31 अगस्त तक।
चातुर्मास : 148 दिन (29 जून से 23 नवंबर तक) अधिकमास के चलते चातुर्मास की अवधि एक महीने अधिक होगी।
देवशयनी एकादशी : 29 जून
रक्षाबंधन : 30 अगस्त
गणेश चतुर्थी : 19 सितंबर
शारदीय नवरात्र : 15 अक्टूबर से
दशहरा : 24 अक्टूबर
दीपोत्सव: 10 नवंबर से
देवउठनी एकादशी : 23 नवंबर
(पं.दामोदर प्रसाद शर्मा के मुताबिक)
ज्योतिषाचार्य शर्मा ने बताया कि इस माह में भागवत कथा, राम कथा के साथ ही अन्य धर्मग्रंथों का पठन-वाचन किया जा सकेगा। विवाह, नामकरण, मुंडन व यज्ञोपवीत संस्कार नहीं कर सकेंगे।
29 जुलाई कमला—पुरुषोत्तम एकादशी (कृष्ण पक्ष)
11 अगस्त स्मार्त, 12 को वैष्णव मत, कमला पुरुषोत्तम एकादशी (शुक्ल पक्ष)
अधिक मास की एकादशी
हर तीन साल बाद आता है यह
ज्योतिषाचार्य पं.पुरुषोत्तम गौड़ ने बताया कि शास्त्रों-पुराणों के अनुसार अधिक मास में भगवान शिव-विष्णु के पूजन-आराधना का विशेष महत्व है। हिंदू धर्म में ग्रह-नक्षत्रों के आधार पर यह मास हर तीन साल बाद आता है। दरअसल, सूर्य वर्ष 365 दिन और 6 घंटे तथा चंद्र वर्ष 354 दिन का होता है। सूर्य-चंद्र मास के बीच 11 दिन का अंतर आता है, जो कि तीन साल में एक महीने के बराबर होने से अधिक मास के रूप में आता है।
Published on:
09 Dec 2022 09:57 pm
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