
राजस्थान में लागू हुई स्क्रैप पॉलिसी के प्रति लोगों में जागरूकता देखी जा रही है। पिछले दो महीने में करीब 284 वाहनों को स्क्रैप किया गया है। लोग कंडम वाहनों को आगे आकर स्क्रैप करा रहे हैं। इससे उन्हें न केवल स्क्रैप कराने के पैसे मिल रहे हैं, बल्कि पुराने वाहन से होने से वाले झंझटों से निजात भी मिल रही है।
परिवहन विभाग की ओर से जयपुर में दो स्क्रैप सेंटर शुरू किए गए हैं। पहला सेंटर अजमेर रोड पर महला में शुरू किया गया है। वहीं, दूसरा स्क्रेपिंग सेंटर माधोराजपुरा फागी में शुरू किया गया है। पन्द्रह वर्ष की अवधि पूरी कर चुके वाहनों को यहां पर स्क्रैप किया जा रहा है। इन स्क्रेपिंग सेंटर पर निजी वाहनों के साथ-साथ पुराने सरकारी वाहनों को भी स्क्रैप किया जा रहा है।
जागरूकता के ये तीन प्रमुख कारण
रजिस्ट्रेशन पर मिल रही 25 फीसदी छूट
पुराने व कंडम वाहन स्क्रैप करवाने से फायदा मिल रहा है। स्क्रैप करवाने के बाद दो तरह के प्रमाण दिए जा रहे हैं। नए निजी वाहन की खरीद पर एक प्रमाण लगाने से वन टाइम टैक्स में 25 फीसदी की छूट मिल रही है। वहीं, स्क्रेपिंग प्रमाण पत्र को कॉमर्शियल वाहन की खरीद पर दिखाने पर मोटर वाहन टैक्स में 15 प्रतिशत की छूट दी जा रही है।
वाहन के दुरुपयोग से निजात
वाहन स्क्रैप कराने के बाद लोग चिंता मुक्त हो रहे हैं। अक्सर पुराने वाहनों को अनाधिकृत सेंटर पर स्क्रैप के लिए डाला जाता है। इसके बाद भी वाहन के दुरुपयोग के कई मामले सामने आते हैं। ऐसे में लोग अधिकृत सेंटर पर वाहन स्क्रैप कराना पसंद कर रहे हैं। यहां से उन्हें स्क्रेपिंग सर्टिफिकेट दिया जा रहा है। इससे वे किसी भी कानूूनी अड़चन से बच रहे हैं। स्क्रैप के बाद वाहन का डाटा पूरी तरह सेे हटाया जा रहा है।
स्क्रैप कराने के पैसे भी मिल रहे
वाहन स्क्रैप करवाने पर लोगों को कुछ देना नहीं पड़ रहा। स्क्रैप कराने पर लोगों को ही पैसे दिए जा रहे हैं। उदाहरण के तौर पर 15 साल पुरानी कार को स्क्रैप कराने पर 15 हजार रुपए तक दिए जा रहे हैैं। वहीं, स्क्रेपिंग सेंटर में मौजूद अलग-अलग मशीनों से उसे स्क्रैप कर कर री-साइकिल किया जा रहा है। पुराने वाहनों के स्क्रैप होने से प्रदूषण से भी निजात मिलेगी।
पुराने वाहनों को स्क्रैप करने के कई फायदे हैं। इससे एक ओर जहां प्रदूषण कम होगा, वहीं सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी। वाहनों को स्क्रैप कराने वाले लोगों को वाहन खरीद में टैक्स में छूट दी जा रही है।
- मनीषा अरोड़ा, आयुक्त, परिवहन विभाग
Published on:
22 Oct 2023 01:09 am
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