
राजधानी तेजी से शहरीकरण और आर्थिक गतिविधियों का बड़ा केंद्र बन रही है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे, जयपुर-किशनगढ़, जयपुर-आगरा, जयपुर-सीकर और जयपुर-कोटा जैसे नेशनल व स्टेट हाईवे से जुड़े होने के कारण शहर एक लॉजिस्टिक हब के रूप में उभर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कारण शहर के बाहरी इलाकों और अंदरूनी हिस्सों में ट्रैफिक दबाव बढ़ रहा है। ई-कॉमर्स डिलीवरी और भारी वाहनों की बढ़ती आवाजाही देखते हुए अब सिटी लॉजिस्टिक्स प्लान की आवश्यकता महसूस की जा रही है। जयपुर में माल ढुलाई का बड़ा हिस्सा अभी शहर के अंदरूनी इलाकों से होकर गुजरता है। आगरा रोड, अजमेर रोड, टोंक रोड, सीकर रोड और दिल्ली रोड पर दिनभर भारी वाहनों की आवाजाही रहती है। प्रस्तावित योजना के तहत शहर के बाहरी क्षेत्रों में मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क विकसित करने पर जोर दिया गया है।
बाहरी रिंग पर लॉजिस्टिक हब
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे, रिंग रोड और आउटर बाइपास के पास लॉजिस्टिक पार्क और वेयरहाउस जोन विकसित किए जाएं।इससे भारी ट्रकों का शहर में प्रवेश कम होगा और माल छोटे, पर्यावरण अनुकूल वाहनों से सप्लाई किया जा सकेगा।
माइक्रो-लॉजिस्टिक हब
मानसरोवर, सांगानेर, वैशाली नगर, विद्याधर नगर और जगतपुरा जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में माइक्रो-हब बनाए जाएं।इससे अंतिम छोर तक डिलीवरी आसान होगी, ई-कॉमर्स डिलीवरी तेज होगी और ट्रैफिक दबाव घटेगा।
इलेक्ट्रिक और छोटे वाहन
शहर के अंदर माल ढुलाई के लिए इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर और छोटे ई-वाहनों को बढ़ावा दिया जाए। इससे प्रदूषण कम होगा और संकरी सड़कों पर भी डिलीवरी सुगम होगी।
शहर की अर्थव्यवस्था को लाभ
सिटी लॉजिस्टिक्स प्लान से न केवल ट्रैफिक जाम कम होगा, बल्कि व्यापारियों, उद्योगों और उपभोक्ताओं को भी फायदा मिलेगा। डिलीवरी लागत घटेगी, समय की बचत होगी और शहर की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग बेहतर होगी।
वेयरहाउस योजनाएं और अवैध निर्माण
- जेडीए हाईवे किनारे वेयरहाउस योजनाएं ला रहा है और निजी डवलपर्स भी छह से अधिक वेयरहाउस विकसित कर रहे हैं।
- सेवापुरा में अवैध गोदाम बनाए जा रहे हैं। दौलतपुरा में बालाजी वेयरहाउस पर दो बार कार्रवाई के बाद भी काम जारी है। यहां नाले की जमीन पर सड़क तक बना दी गई है, जिससे जेडीए को राजस्व नुकसान और अव्यवस्थित विकास हो रहा है।
- दौलतपुरा टोल प्लाजा के पास सफेदा के पेड़ काटकर अवैध वेयरहाउस बनाए गए हैं, जिन पर जेडीए के प्रवर्तन अधिकारी की नजर नहीं पड़ रही है।
विशेषज्ञ की राय
जयपुर के लिए लॉजिस्टिक्स प्लान अब आवश्यकता बन चुका है। जिस गति से ई-कॉमर्स, रिटेल सप्लाई और निर्माण गतिविधियां बढ़ रही हैं, उसी अनुपात में भारी वाहनों का दबाव भी शहर की सड़कों पर बढ़ा है। यदि लॉजिस्टिक्स को शहरी विकास योजना से नहीं जोड़ा गया तो ट्रैफिक जाम, वायु प्रदूषण और आर्थिक लागत कई गुना बढ़ सकती है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे और जयपुर को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग शहर के लिए बड़ा अवसर हैं। राज्य सरकार यदि आगामी बजट में सिटी लॉजिस्टिक्स प्लान के लिए अलग मद बनाती है, तो जयपुर के साथ अन्य शहरों को भी लाभ होगा।
-चंद्रशेखर पाराशर, अतिरिक्त मुख्य नगर नियोजक (सेवानिवृत्त)
Published on:
23 Jan 2026 05:32 pm
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