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भाजपा छोड़कर गए 30 नेता पार्टी के संपर्क में

घर वापसी पर स्वागत... शर्त है विधानसभा चुनाव में टिकट का दावा नहीं करेंगेलोकसभा चुनाव में बागी या अन्य प्रत्याशी पार्टी में आना चाहें तो होगा तुरंत निर्णय

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अरविन्द सिंह शक्तावत

जयपुर. विधानसभा चुनाव में छह माह बचे हैं। भाजपा में शामिल होने के लिए करीब 30 नेता पार्टी के संपर्क में है। इनमें से ज्यादातर वो नेता हैं, जो 2018 के चुनाव से पहले पार्टी छोड़ कर चले गए थे। इन्हें पार्टी वापस लेने को तैयार तो है, लेकिन इनके सामने शर्त रख दी है कि वे विधानसभा चुनाव में टिकट का दावा नहीं करेंगे। पार्टी को लगेगा कि चुनाव लड़वाया जा सकता है तो ही पार्टी चुनाव लड़वाएगी।

पार्टी से जुड़े सूत्रों के अनुसार भाजपा ने एक पॉलिसी बनाई है। इसके तहत ही पार्टी में वापसी होगी। इसके लिए कमेटी का भी गठन किया जा चुका है। इस कमेटी में केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और पूर्व मंत्री एवं विधायक वासुदेव देवनानी शामिल हैं। यह दो सदस्यीय कमेटी पार्टी में शामिल होने वाले नेताओं के संपर्क में हैं। जो 30 नेता पार्टी के संपर्क में है, उनमें सात-आठ पूर्व विधायक हैं। इन विधायकों को पार्टी ने 2018 के विस चुनाव में टिकट नहीं दिया था। विजय बंसल, सुरेन्द्र गोयल सहित ऐसे अन्य नाम हैं, जिनके पार्टी में शामिल होने की चर्चाएं हैं। इन 30 में से कई नेता पार्टी में शामिल हो जाते, लेकिन इस शर्त ने कई नेताओं के वापसी के कदम रोक रखे हैं। टिकट उसी स्थिति में दिया जाएगा, जब उनका नाम सर्वे में सबसे ऊपर होगा या कोई मजबूत प्रत्याशी पार्टी को नहीं मिलेगा।

देवी सिंह भाटी का मामला अधर में

एक जमाने में भाजपा के कद्दावर नेता रहे देवी सिंह भाटी की भाजपा में वापसी की चर्चा लंबे समय से चल रही है, लेकिन उनकी वापसी अधर में ही है। केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और देवी सिंह भाटी के रिश्ते अच्छे नहीं है। मेघवाल उस कमेटी के सदस्य हैं, जो यह तय करेगी कि किसे पार्टी में लेना है और किसे नहीं। ऐसे में भाटी की घर वापसी का मामला अधर में ही लटका हुआ है।

कांग्रेस नेता भी संपर्क में, आएंगे कब यह तय नहीं

बताया जा रहा है कि कुछ कांग्रेस नेता भी भाजपा के नेताओं के संपर्क में है, लेकिन वे भाजपा में शामिल होंगे या नहीं। इस पर अभी कोई पॉलिसी तय नहीं की गई है। यह भी चर्चा है कि केबिनेट मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल रहे दो नेता भी भाजपा के संपर्क में है।

नागौर-दौसा लोकसभा क्षेत्रों के लिए शर्तें कम
पार्टी ने विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव लड़ने वालों के लिए अलग-अलग पॉलिसी बनाई है। इसके तहत यदि किसी नेता ने वर्ष 2019 में लोकसभा चुनाव लड़ा है। चाहे वो बागी हो या अन्य दल का। उसे पार्टी में शामिल कर लिया जाएगा। यही वजह रही कि सीकर से कांग्रेस चुनाव लड़ चुके सुभाष महरिया की वापसी में ज्यादा दिक्कत नहीं आई। पार्टी का मुख्य फोकस दौसा और नागौर सीट पर है। आलाकमान ने अपनी रिपोर्ट में इन दोनों लोकसभा सीटों को ही सबसे कमजोर माना है। ऐसे में इन दोनों लोकसभा क्षेत्रों से कोई भी पार्टी ज्वाइॅन करने की इच्छा जताएगा तो शर्तें भी कम हो जाएगी।


भाजपा में आने वाले हर व्यक्ति का स्वागत है
कोई भी नेता जो पीएम नरेन्द्र मोदी के प्रति विश्वास व्यक्त करे और भाजपा की नीतियों में आस्था रखे। पार्टी में आने की कोई शर्त न रखे। उन सबका भाजपा में स्वागत है। घर से भटका हुआ है तो उसे पार्टी वापस लेने को तैयार है।

- वासुदेव देवनानी, सदस्य, भाजपा ज्वॉइनिंग कमेटी, राजस्थान