
महज आशंका में पकड़े 30 हजार, फिर भी अपराध पर नहीं लगा सके लगाम
जयपुर. असामाजिक तत्वों के खिलाफ पुलिस के राज्यव्यापी अभियान के दौरान गिरफ्तार 46,865 लोगों में से 30,450 तो महज शांति भंग की आशंका में पकड़े गए। इससे गिरफ्तारी का आंकड़ा तो बड़ा हो गया, लेकिन अपराधियों पर न तो कोई दबाव बन सका और न ही अपराध पर लगाम लग सकी। पुलिस मुख्यालय ने 1 मार्च से 25 जून 2023 तक वारंटियों व अपराधियों को गिरफ्तार करने का अभियान चलाया। इस दौरान पुलिस ने 30,450 लोगों को जहां-तहां से उठाकर बंद कर दिया। शांति भंग की आशंका (सीआरपीसी की धारा 151) के तहत गिरफ्तारी होने के कारण वे शाम तक जमानत पर घर भी लौट गए।
अपराधियों में कम हुआ भय, पुलिस पर हमले बढ़े
अपराधियों में पुलिस का भय खत्म होता जा रहा है। जिसका नतीजा है कि पुलिस पर अपराधी हमला तक कर देते हैं। हाल ही दौसा में पुलिसकर्मी के सिर में गोली मार दी गई। बाद में पुलिसकर्मी की इलाज के दौरान मौत हो गई। वहीं, उदयपुर में छापा मारने गई पुलिस पर लोगों ने हमला कर दिया। जिसके चलते एसएचओ समेत सात लोग घायल हो गए।
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अभियान के दौरान गिरफ्तारी
30,450: शांति भंग में गिरफ्तार
4,337: स्थायी वारंटी, उद्घोषित अपराधी
3,721: सामान्य प्रकरण में वांछित
361: एनडीपीएस, आम्म्म्र्स, आबकारी अधिनियम में गिरफ्तार
2,220: हिस्ट्रीशीटर व इनामी
801: जघन्य अपराध में वांछित
352: अवैध खनन में गिरफ्तार
क्या कहती है धारा 151 सीआरपीसी?
एडवोकेट हिम्मत सिंह ने बताया कि धारा 151 संज्ञेय अपराधों के खिलाफ निरोधात्मक कार्रवाई है। पुलिस को अगर सूचना मिले कि कहीं संज्ञेय अपराध हो सकता है तो ऐसे में बिना वारंट के गिरफ्तारी की जा सकती है, लेकिन अपराध होने की आशंका या जानकारी होना अनिवार्य है।
सभी मामलों में कार्रवाई
अपराध होने की आशंका के चलते बड़ी संख्या में आपराधिक पृष्ठभूमि के लोगों को शांतिभंग में पकड़ा गया। इसके अलावा संगठित अपराध से जुड़े गिरोह के बदमाशों को भी पकड़ा गया है।
-दिनेश एम.एन, एडीजी क्राइम
Published on:
11 Sept 2023 12:59 am
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