
Nirjala Ekadashi 2023: निर्जला एकादशी का व्रत सनातन धर्म में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। 31 मई को निर्जला एकादशी बुधवार को सर्वाार्थ सिद्धि और रवि योग में मनाई जाएगी। निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस व्रत में एकादशी के दिन सुबह से लेकर अगले दिन सूर्योदय तक जल और अन्न ग्रहण नहीं किया जाता है। पं. अनीष व्यास के अनुसार, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो व्यक्ति निर्जला एकादशी व्रत रखता है, उसे सभी 24 एकादशी व्रतों का फल प्राप्त होता है। शास्त्रों के अनुसार, इस विशेष दिन पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की उपासना करने और निर्जला उपवास रखने से विशेष लाभ मिलता है।
निर्जला एकादशी पर करें यह जरूरी काम
- मंदिरों में दान पुण्य करें
- इस दिन शरबत का दान, फल आदि बांटना चाहिए
- पक्षियों को दाना डालें और गाय को खाना खिलाएं
- परिवार की सुख समृद्धि की कामना करें
निर्जला एकादशी का महत्त्व
निर्जला एकादशी के व्रत को लेकर माना जाता है कि यदि आप पूरे साल व्रत नहीं करते हैं और आप सिर्फ एक यह व्रत करते हैं तो सभी एकादशी का फल मिलता है। निर्जला एकादशी के व्रत को 'देवव्रत' भी कहा जाता है क्योंकि सभी देवता,दानव,किन्नर,नाग,गन्धर्व,यक्ष नवग्रह आदि अपनी रक्षा और भगवान की कृपा प्राप्त करने के लिए एकादशी का व्रत करते हैं।
निर्जला एकादशी मुहूर्त
- एकादशी तिथि प्रारम्भ: 30 मई को दोपहर 1:32 बजे
- एकादशी तिथि समाप्त: 31 मई को दोपहर 1:36 बजे
- निर्जला एकादशी का पारण: 01 जून को सुबह 05:24 से सुबह 08:10 बजे तक
Published on:
30 May 2023 10:45 am
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