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वेंटिलेटर पर व्यवस्था! इलाज को भटकते मासूम ने तोड़ा दम, शादी की सालगिरह के दिन मिला बेटे की मौत का दर्द

जाननलेवा हुई डॉक्टर्स की हड़ताल, चार महीने के मासूम बच्चे से सांसे छीन लीं, माता पिता की मैरिज एनिवर्सरी के दिन घर आई बच्चे की लाश

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4 month boy died amidst Doctors Strike in Rajasthan

जयपुर।

राजस्थान सरकार जहां स्वास्थ्य का अधिकार बिल लाकर वाहवाही लूट रही है, वहीं बिल विधानसभा में पारित होने के एक दिन बाद ही इलाज के इंतजार में चार माह के रुबिन की मौत हो गई। सीकर जिले के धाननी ग्राम पंचायत के गांव कोका की ढाणी के रहने वाले रुबिन के पिता जितेंद्र लाम्बा ने बताया कि बुधवार सुबह बीमार बच्चे को सीकर के जनाना अस्पताल ले गए, लेकिन वहां से जयपुर जाने को कह दिया गया।

सीकर के सभी निजी अस्पतालों में हड़ताल के कारण जयपुर के लिए सरकारी एम्बुलेंस बुलाई, लेकिन उसमें आईसीयू की सुविधा नहीं थी। बाद में एक ओर एम्बुलेंस बुलाई, पर कंपाउंडर ने जाने से मना कर दिया। कंपाउंडर ने अपने किसी जानकार की एंबुलेंस बुलाई और ढाई घंटे बाद बच्चे को लेकर रवाना हुए। दोपहर में जयपुर में जेके लोन अस्पताल के गेट के बाहर पहुंचने पर एम्बुलेंस में बैठे कंपाउंडर ने कहा कि बच्चे की सांस थम चुकी है।

शादी की सालगिरह के दिन मिला बेटे की मौत का दर्द
लाम्बा परिवार को चार महीने पहले बेटे के जन्म की खुशियां मिलीं। बेटे को लेकर परिवार के लोगों ने बड़े सपने भी देखे। रुबिन के पिता जितेन्द्र व मां उर्मिला ने बुधवार को शादी की चौथी सालगिरह बच्चे के साथ मनाने की खास तैयारी भी की थी। जितेन्द्र इंदिरा गांधी नहरी परियोजना तारानगर में कनिष्ठ सहायक के पद पर कार्यरत हैं। इधर, आंदोलन कर रहे डॉक्टरों ने कहा कि हम से भी नहीं देखा जाता मरीजों का दर्द। मगर सरकार हमारी भी सुने। सरकार यह बिल सिर्फ निजी अस्पतालों पर थोपना चाहती है।

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प्राधिकरण के फैसले को दे सकेंगे चुनौती
चिकित्सा विभाग के निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. वी.के. माथुर ने बताया की राइट टू हेल्थ अधिनियम के अधीन गठित प्राधिकरण के फैसले को सिविल कोर्ट में चुनौती नहीं देने के प्रावधान को हटा दिया गया है। अब प्राधिकरण के फैसले को अदालत में चुनौती देने का अधिकार रहेगा।

प्रतियां जलाईं
बुधवार सुबह निजी चिकित्सकों ने एसएमएस मेडिकल कॉलेज परिसर में एकत्रित होकर अपने रजिस्ट्रेशन, मार्कशीट और राइट टू हेल्थ बिल की प्रतियां जलाकर विरोध जताया। निजी डॉक्टरों ने अनिश्चितकालीन बंद का आह्वान किया है।

एसएमएस अस्पताल में बिगड़ी व्यवस्था
एसएमएस मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पतालों में करीब 1000 सीनियर डॉक्टर व करीब 500 रेजिडेंट हैं। रेजिडेंट्स के हड़ताल पर जाते ही व्यवस्था बिगड़ जाती हैं। ऑपरेशन की तैयारियां इन्हीं के जिम्मे होती हैं। आउटडोर, वार्ड व आईसीयू में भी ये ही कमान संभालते हैं।

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कैंसर, किडनी के रोगियों पर आफत
हड़ताल के कारण रोजाना सैंकड़ों ऑपरेशन और जांचें टल रही हैं। जिनमें कैंसर, किडनी सहित गंभीर व अन्य बीमारियों के मरीज शामिल हैं।

तीन दिन से नहीं हो रहा नितेश का ऑपरेशन
गंगापुरसिटी निवासी नितेशराज का तीन दिन पहले सरमथुरा में एक्सीडेंट हो गया था। जिसमें पांव की हड्डी टूट गई। पहले करौली, फिर इलाज नहीं मिला तो जयपुर रैफर कर दिया गया। हड़ताल के कारण दो दिन से सर्जरी टल रही है।

नहीं सुन रही सरकार
सिर्फ निजी अस्पतालों पर थोपे गए बिल की प्रदेश को कोई जरूरत नहीं है। मरीजों का दर्द हमसे भी नहीं देखा जाता, लेकिन सरकार सिर्फ वाहवाही लूटने के लिए डॉक्टरों की जायज मांगें सुनने को तैयार नहीं है।- डॉ.विजय कपूर, सचिव, प्राइवेट हॉस्पिटल्स एंड नर्सिंग होम सोसायटी

मरीजों की पीड़ा का हमें दुख है। निजी अस्पतालों की समस्याओं को सुनकर उनका निस्तारण करना सरकार का कर्तव्य है, लेकिन हठधर्मिता के कारण इन्हें दरकिनार किया जा रहा है। -डॉ.सुनील चुघ, अध्यक्ष, जॉइंट एक्शन कमेटी