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अंटार्कटिका में बर्फ की चादर के नीचे मिली एक रहस्यमयी नदी

वैज्ञानिकों को चिंता: तापमान बढ़ा तो तेज कर देगी यह नदी बर्फ का नुकसान

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जयपुर

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Aryan Sharma

Oct 28, 2022

अंटार्कटिका में बर्फ की चादर के नीचे मिली एक रहस्यमयी नदी

अंटार्कटिका में बर्फ की चादर के नीचे मिली एक रहस्यमयी नदी

लंदन. अंटार्कटिका में बर्फ की चादर (Antarctic ice sheet) के नीचे एक रहस्यमयी नदी पाई गई है। वैज्ञानिकों का कहना है कि तापमान में वृद्धि होने पर यह बर्फ के नुकसान को तेज कर सकती है। यह नदी 460 किलोमीटर लंबी है, जो लंदन की टेम्स नदी (346 किमी) से भी बड़ी है। लंदन के इंपीरियल कॉलेज और अन्य संस्थानों के शोधकर्ताओं के अनुसार यह नदी बर्फ की मोटी चादर के आधार के पिघलने का नतीजा है, जो अब तक ज्ञात नहीं था। हवाई रडार सर्वेक्षण और जल विज्ञान मॉडल के जरिए शोधकर्ताओं ने नदी को खोजा।

दशकों पूर्व मिली थीं झीलें
वैज्ञानिकों ने दुर्गम और कम अध्ययन वाले क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित किया। इसमें पूर्व और पश्चिम अंटार्कटिक में बर्फ की चादर शामिल है। कुछ दशकों पहले अंटार्कटिका में बर्फ के नीचे झीलें भी पाई गई थीं। उस समय वैज्ञानिकों को लगा कि ये एक-दूसरे से अलग हैं। लेकिन अब वे समझने का प्रयास कर रहे हैं कि बर्फ के नीचे ये प्रणालियां, विशाल नदी नेटवर्क से जुड़ी हुई तो नहीं हैं।

आधार तय करेगा बर्फ का भविष्य
शोध क्षेत्र में मौजूद बर्फ दुनियाभर के समुद्री जल स्तर को 4.3 मीटर तक बढ़ा सकती है। बर्फ का कितना भाग, किस तीव्रता से पिघलेगा यह तथ्य इस बात से जुड़ा है कि आधार में कितनी फिसलन है। रहस्यमयी नदी बर्फ के नीचे से बहते हुए कई स्थानों पर समुद्र में मिलती है। इस दौरान उच्च दबाव के साथ बड़ी मात्रा में ताजा पानी को अपने साथ ले जाती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह बहाव बर्फ की चादर को चिकनाई देते हुए समुद्र में बर्फ के प्रवाह को बढ़ा सकता है।

बदल गई पहले की अवधारणा
बर्फ की चादर के नीचे पानी दो वजहों से हो सकता है। बर्फीली सतह के पिघलने पर दरारों के माध्यम से और पृथ्वी की ऊष्मा से आधार के पिघलने पर। अंटार्कटिका में बर्फीली सतह कम पिघलती है क्योंकि यहां गर्मियों में भी तापमान बेहद कम रहता है। इसलिए हमेशा यही माना गया कि अंटार्कटिका में बर्फ की चादरों के आधार पर अपेक्षाकृत कम पानी है। लेकिन नई खोज दर्शाती है कि बर्फीली सतह के नीचे पहले के मुकाबले अधिक जल प्रवाहित हो रहा है, जो इसे जलवायु परिवर्तन के प्रति ज्यादा संवेदनशील बना सकता है।

बर्फ की चादर